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जिला प्रशासन द्वारा भ्रामक जानकारी फैलाने पर संस्था को नोटिस जारी

राजनांदगांव 23 अप्रैल 2026 (IMNB NEWS AGENCY) सहायक संचालक जिला कौशल विकास प्राधिकरण ने शाही नामक संस्था को प्रशासनिक आदेशों की प्रत्यक्ष अवज्ञा करने तथा हितग्राहियों की सुरक्षा, सत्यापन, निगरानी एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को गंभीर रूप से प्रभावित करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संस्था को सुस्पष्ट, तथ्यपरक, अभिलेखीय साक्ष्यों सहित एवं बिंदुवार स्पष्टीकरण सात दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यालय जिला कौशल विकास प्राधिकरण राजनांदगांव में प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए गए है। निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने अथवा प्रस्तुत स्पष्टीकरण असंतोषजनक, भ्रामक, अपूर्ण पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार कठोर एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में किसी भी शासकीय कार्य, योजना, निविदा से पूर्णत: प्रतिबंधित करने के साथ ही आवश्यकतानुसार अन्य विधिक व दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

प्राप्त जानकारी अनुसार जिला प्रशासन से शाही नामक संस्था द्वारा जिले में केवल मोबिलाइजेशन हेतु अनुमति अभ्यर्थित की गई थी। जिसके परिप्रेक्ष्य में केवल मोबिलाइजेशन कार्य की अनुमति प्रदान की गई है। संज्ञान में आया है कि संस्था द्वारा प्रदत्त अनुमति की शर्तों की अवहेलना, घोर उल्लंघन एवं दुरूपयोग करते हुए हितग्राहियों को अन्यत्र स्थानों पर रोजगार उपलब्ध कराने व राज्य के बाहर भेजे जाने हेतु प्रलोभित व प्रेरित किया जा रहा है, जो अनधिकृत, नियम विरूद्ध, भ्रामक एवं प्रशासन की पूर्व स्वीकृति के अभाव में किया गया अवैध कृत्य है। संस्था द्वारा जिले की 6-7 महिला हितग्राहियों को प्रशिक्षण के नाम पर रायपुर बुलाया गया और रायपुर पहुंचने पर महिला हितग्राहियों को बैंगलोर में प्रशिक्षण एवं रोजगार के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई। इस परिस्थिति से भयभीत होकर संबंधित हितग्राहियों द्वारा वापस लौटना पड़ा। यह कृत्य स्पष्ट रूप से भ्रामक प्रस्तुतीकरण, विश्वासभंग एवं हितग्राहियों को गुमराह करने की श्रेणी में आता है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। प्रथम दृष्टया असत्य, भ्रामक एवं प्रशासन की छवि व विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला पाया गया है। बिना सक्षम प्राधिकारी की विधिवत स्वीकृति के इस प्रकार का कथन करना गंभीर अनियमितता एवं दुराचार की श्रेणी में आता है। संस्था द्वारा यह कृत्य न केवल प्रशासनिक आदेशों की प्रत्यक्ष अवज्ञा का द्योतक है। इसके साथ ही हितग्राहियों की सुरक्षा, सत्यापन, निगरानी एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला एवं जोखिमपूर्ण है। जिसे किसी भी स्थिति में सहन एवं स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है।

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