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बस्तर जिले में राशनकार्ड हितग्राहियों की ई-केवाईसी 08 दिसंबर तक अनिवार्य

कलेक्टर   हरिस एस ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए जिले के सभी राशनकार्ड हितग्राहियों की ई-केवाईसी की कार्यवाही 08 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कराने का आदेश दिया है। यह सख्त फैसला 26 नवंबर को आयोजित साप्ताहिक विडियो कॉन्फ्रेंस में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय के संचालक द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
जिले में वर्तमान में राशनकार्डों में पंजीकृत कुल 8 लाख 23 हजार 610 सदस्यों में से 6 लाख 72 हजार 9 सदस्यों का ई-केवायसी कार्य पूर्ण हो चुका है। हालांकि अभी भी 1 लाख 51 हजार 601 सदस्यों का ई-केवायसी किया जाना शेष है। इस शेष कार्य को समय सीमा में पूरा करने के लिए जिले में विकासखण्डवार और नगरीय निकायवार दैनिक लक्ष्य 13 हजार 782 निर्धारित किया गया है। शेष सदस्यों की सर्वाधिक संख्या 29 हजार 171 बकावण्ड और 29 हजार 351 बस्तर विकासखण्डों में है, जिनके लिए क्रमशः 2,652 और 2,668 का दैनिक लक्ष्य तय किया गया है।
कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि 08 दिसंबर तक ई-केवाईसी पूर्ण कराने हेतु उचित मूल्य दुकानवार निर्धारित लक्ष्य की जानकारी संलग्न की गई है। सभी सहायक खाद्य अधिकारी एवं खाद्य निरीक्षक द्वारा अपने कार्यक्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों में ई-केवायसी की प्रतिदिन मॉनिटरिंग किया जाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त सभी उचित मूल्य दुकानों और ग्राम पंचायतों में ई-केवाईसी कराने के संबंध में बेनर-पोस्टर प्रदर्शित कर व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए आयुक्त नगर निगम जगदलपुर और समस्त जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देशित किया गया है।
विशेष तौर पर राशनकार्डों में दर्ज ऐसे सदस्य जिनका ई-केवायसी शेष है और जिनकी मृत्यु हो गयी है अथवा जो परिवार के साथ स्थाई रूप से निवासरत नहीं हैं, उनके नाम राशनकार्डों से विलोपित करने हेतु उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में जानकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई जानी है। साथ ही नए बनाये गये राशनकार्डों व नए जोड़े गये सदस्यों के ई-केवायसी का कार्य नवीन राशनकार्डधारी या नए सदस्य के द्वारा राशन लेने हेतु प्रथम बार उचित मूल्य दुकान में उपस्थित होने पर ही अनिवार्य रूप से पूर्ण कराया जाए। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि यदि 08 दिसंबर तक ई-केवायसी का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण नहीं होता है, तो संबंधित क्षेत्र के सहायक खाद्य अधिकारी और खाद्य निरीक्षक को इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

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