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बकरी पालन से बदली आर्थिक तस्वीरः रानी ओझा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

*मनरेगा और डीएमएफ के अभिसरण से बना बकरी शेड, अब सुरक्षित पशुपालन से बढ़ी आय और आत्मविश्वास*

 

रायपुर, 30 अप्रैल 2026 (IMNB NEWS AGENCY) बकरी पालन ग्रामीण में आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख जरिया बन गया है। यह कम लागत वाला व्यवसाय महिलाओं और छोटे किसानों के लिए आय का एक मजबूत, टिकाऊ स्रोत बनकर उभरा है।

 

धमतरी जिले के कातलबोड़ ग्राम पंचायत की निवासी रानी ओझा ने बकरी पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है। कभी खुले आसमान के नीचे बकरियों को रखने की मजबूरी और उससे होने वाली परेशानियों से जूझने वाली रानी आज सुरक्षित बकरी शेड के सहारे न केवल अपने पशुधन की बेहतर देखभाल कर रही हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर चुकी हैं। यह बदलाव मनरेगा और जिला खनिज संस्थान न्यास के अभिसरण से संभव हो पाया है, जिसके तहत उनके लिए बकरी शेड का निर्माण किया गया।

 

रानी ओझा जो कि एक स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं, ने बताया कि पहले बकरियों को खुले में रखने के कारण उन्हें मौसम की मार, बीमारियों और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इससे न केवल पशुधन को नुकसान होता था, बल्कि उनकी आय पर भी प्रतिकूल असर पड़ता था। लेकिन शासन की योजनाओं के सहयोग से बने बकरी शेड ने उनकी इन समस्याओं का समाधान कर दिया है।

 

मनरेगा के तहत स्व-सहायता समूहों के आजीविका संवर्धन के लिए बकरी शेड निर्माण की योजना के अंतर्गत रानी ओझा को लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये की राशि स्वीकृत हुई, वहीं जिला खनिज संस्थान न्यास से भी लगभग 1 लाख 66 हजार रुपये का सहयोग मिला। इस संयुक्त प्रयास से निर्मित बकरी शेड ने उनके पशुपालन कार्य को नई दिशा दी।

 

शुरुआत में रानी ने 11 बकरियों के साथ इस कार्य को शुरू किया था। बेहतर देखभाल और सुरक्षित वातावरण मिलने से बकरियों की संख्या में वृद्धि हुई और उनकी बिक्री से आय भी बढ़ी है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। वर्तमान में वे लगभग 40 बकरियों का पालन कर रही हैं और आगे इसे और बढ़ाने की योजना बना रही हैं।

 

रानी ओझा का कहना है कि बकरी शेड निर्माण से न केवल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि उन्हें अपने कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है। अब वे अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं, जो पशुपालन के माध्यम से अपनी आजीविका को सुदृढ़ करना चाहती हैं।

 

ग्राम पंचायत के सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल को सराहा है और बताया कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। रानी ओझा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

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