Ro no D15139/23

जैविक खेती की ओर बढ़ रहे किसान, नील हरित शैवाल से सुधर रही मिट्टी की सेहत मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में सकारात्मक पहल

रायपुर, 02 जून 2026/ छत्तीसगढ़ में टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसान अब जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में प्रदेश के कई किसान मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन लागत कम करने और दीर्घकालीन कृषि लाभ सुनिश्चित करने के लिए जैविक विकल्पों की ओर अग्रसर हैं। नील हरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी) का उपयोग भी ऐसी ही एक प्रभावी तकनीक के रूप में उभर रहा है, जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की पूर्ति कर उसकी उर्वरता बढ़ाने में सहायक है।

प्रदेश में कई प्रगतिशील किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर वैज्ञानिक खेती को अपनाते हुए जैविक उपायों का प्रयोग कर रहे हैं। सरगुजा जिले के किसान श्री धनेश्वर प्रसाद ने भी कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर अपनी खेती में नील हरित शैवाल आधारित जैविक पद्धति को अपनाया है। मिट्टी परीक्षण में नाइट्रोजन की कमी पाए जाने के बाद उन्होंने अपने स्तर पर नील हरित शैवाल उत्पादन की पहल की, जिससे खेतों को प्राकृतिक पोषण उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार नील हरित शैवाल धान आधारित कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का एक प्रभावी जैविक माध्यम है। इसके उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है तथा भूमि की उत्पादक क्षमता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। इससे खेती अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनती है।

जैविक खेती के बढ़ते प्रयोग से किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त होने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक विकल्पों को अपनाने से कृषि लागत कम की जा सकती है तथा भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मिट्टी परीक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में किसानों की बढ़ती भागीदारी न केवल कृषि उत्पादन को स्थायी आधार प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

  • Related Posts

    बहुमंजिला भवनों, कोचिंग संस्थानों, होटलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का होगा विशेष ऑडिट

    *मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश*   *राज्यभर में अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं की होगी व्यापक जांच*   *जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, किसी भी…

    Read more

    छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के स्थापना का प्रस्ताव, अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर, 24 जून 2026- छत्तीसगढ़ को आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को…

    Read more

    NATIONAL

    ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच होगी… वरना बातचीत रद्द कर देता, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर फंसाया पेंच

    ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच होगी… वरना बातचीत रद्द कर देता, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर फंसाया पेंच

    अभिषेक बनर्जी के ‘महल’ पर शुभेंदु अधिकारी की नजर, अवैध संपत्ति जब्त कर भूमिहीनों को देगी बंगाल सरकार

    अभिषेक बनर्जी के ‘महल’ पर शुभेंदु अधिकारी की नजर, अवैध संपत्ति जब्त कर भूमिहीनों को देगी बंगाल सरकार

    60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

    60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

    अमन यादव के नेतृत्व में भारतीय उच्चायोग के आमंत्रण पर म्यूथाई दल ने भारतीय दूतावास परिसर में मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

    अमन यादव के नेतृत्व में भारतीय उच्चायोग के आमंत्रण पर म्यूथाई दल ने भारतीय दूतावास परिसर में मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

    राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं योग और समुद्री सामर्थ्य, कोलकाता में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं योग और समुद्री सामर्थ्य, कोलकाता में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    मौसम: अब मॉनसून बढ़ेगा आगे, इन राज्यों में अगले दो दिन होगी भारी बारिश

    मौसम: अब मॉनसून बढ़ेगा आगे, इन राज्यों में अगले दो दिन होगी भारी बारिश