Ro no D15139/23

पूर्व तानाशाह गद्दाफी का बेटा सैफ अल-इस्लाम मारा गया, घर के गार्डन में घुसकर हमलावरों ने गोलियों से भूना

Saif al-Islam Gaddafi: पूर्व तानाशाह गद्दाफी के वारिस सैफ अल-इस्लाम को मार दिया गया है. चार हमलावर जिंटान में उनके घर में घुस गए और उन्हें गोली मार दी. 2011 की क्रांति के बाद से वह अपने विरोधियों के निशाने पर थे. क्या सैफ की मौत से लीबिया में नया गृह युद्ध शुरू होगा? गद्दाफी के बेटे के उदय और पतन की पूरी कहानी जानें.

लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी के सबसे चर्चित बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की हत्या कर दी गई है. सऊदी अरब के पब्लिकेशन ‘अल अरबिया’ के मुताबिक, चार हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया. 53 साल के सैफ अल-इस्लाम पर यह हमला राजधानी त्रिपोली से करीब 136 किलोमीटर दूर ‘जिंटान’ शहर में हुआ.

गार्डन में मारी गोली

गद्दाफी परिवार के एक करीबी सूत्र ने ‘अल अरबिया’ को बताया कि हमलावरों ने मंगलवार शाम सैफ अल-इस्लाम को उनके घर के गार्डन में निशाना बनाया. हमलावर उन्हें गोली मारकर मौके से फरार हो गए. यह घटना स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 2:30 बजे की है. हालांकि अभी तक इस मर्डर की पूरी डिटेल्स सामने नहीं आई हैं, लेकिन सैफ के करीबियों ने इसे एक सोची-समझी ‘साजिश’ या ‘एसेसिनेशन’ करार दिया है.

करीबियों ने सोशल मीडिया पर की पुष्टि

सैफ अल-इस्लाम के राजनीतिक सलाहकार और उनकी टीम के सदस्य रहे अब्दुल्ला उस्मान ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए इस खबर की पुष्टि की है. उन्होंने लिखा कि हम खुदा के हैं और उन्हीं के पास लौट जाना है. मुजाहिद सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अब खुदा की पनाह में हैं.

वहीं, बीबीसी और एएफपी जैसी न्यूज एजेंसियों ने भी उनकी मौत की खबर दी है. एएफपी के मुताबिक, सैफ के वकील ने बताया कि चार हथियारबंद लोग उनके घर में घुसे थे. हालांकि, उनकी बहन ने लीबियाई टीवी पर एक अलग बात कही है कि उनकी मौत लीबिया-अल्जीरिया बॉर्डर के पास हुई है. अब गद्दाफी की पॉलिटिकल टीम इस पूरे मामले की इंटरनेशनल जांच की मांग कर रही है.

कैसा रहा सैफ अल-इस्लाम का सफर: कभी था ‘किंग’ बनने का दावेदार

सैफ अल-इस्लाम का जन्म 1972 में हुआ था. वह अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी के बाद लीबिया के सबसे पावरफुल इंसान माने जाते थे. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाले सैफ फर्राटेदार इंग्लिश बोलते थे और उन्हें गद्दाफी शासन का ‘पढ़ा-लिखा और मॉडर्न चेहरा’ माना जाता था.

वेस्टर्न देशों से दोस्ती: उन्होंने ही लीबिया के खराब रिश्तों को पश्चिमी देशों के साथ सुधारा था. उन्होंने लीबिया के खतरनाक हथियारों को छोड़ने और 1988 के लॉकरबी बम धमाके के पीड़ितों को मुआवजा दिलवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

रिफॉर्मर की इमेज: वह खुद को एक सुधारक के रूप में पेश करते थे और मानवाधिकारों की बातें करते थे.

2011 की क्रांति और पतन की कहानी

जब 2011 में नाटो के समर्थन से गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ, तो सैफ ने अपनी ‘सुधारक’ वाली छवि छोड़ दी. वह अपने पिता और कबीले के साथ खड़े हो गए. उन्होंने विद्रोहियों को ‘चूहा’ तक कह डाला था और उन पर हुई हिंसक कार्रवाई के मास्टरमाइंड बने. उन्होंने रॉयटर्स से कहा था कि हम लीबिया में ही लड़ेंगे और यहीं मरेंगे.

जब गद्दाफी की सत्ता गिर गई, तो सैफ भेस बदलकर पड़ोसी देश नाइजर भागने की कोशिश कर रहे थे. तभी ‘अबू बक्र सादिक ब्रिगेड’ ने उन्हें रेगिस्तान के रास्ते में पकड़ लिया. यह उनके पिता की मौत के ठीक एक महीने बाद की बात है.

6 साल कैद और मौत की सजा

सैफ ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा (करीब 6 साल) ज़िंटान की जेल में बिताया. जो इंसान कभी पालतू शेर रखता था और लंदन की हाई सोसाइटी में घूमता था, उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया. ह्यूमन राइट्स वॉच ने जब उनसे मुलाकात की थी, तो उनका एक दांत टूटा हुआ था और वह दुनिया से बिल्कुल कट चुके थे.

2015: त्रिपोली की एक अदालत ने उन्हें युद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी.

2017: एक माफी कानून के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया, जिसके बाद वह जान बचाने के लिए ज़िंटान में ही छिपकर रहने लगे.

चुनाव लड़ने की कोशिश और विवाद

2021 में सैफ अल-इस्लाम अचानक दुनिया के सामने आए. उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए पर्चा भरा. वह लोगों के बीच उस दौर की यादें ताजा करना चाहते थे जब उनके पिता के समय देश में शांति (स्टेबिलिटी) थी. लेकिन उनका चुनाव लड़ना भारी विवादों में घिर गया.

हथियारबंद गुटों ने उनका विरोध किया.

2015 की सजा की वजह से उन्हें चुनाव के लिए अयोग्य (Disqualify) करार दिया गया.

जब उन्होंने इसके खिलाफ अपील की, तो लड़ाकों ने कोर्ट का रास्ता ही रोक दिया. इस खींचतान की वजह से लीबिया में चुनाव टल गए और देश में फिर से राजनीतिक अस्थिरता फैल गई. अब उनकी मौत के बाद लीबिया की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है.

  • Related Posts

    15 अगस्त पर Instagram Post को बनाएं यादगार, तिरंगे वाली फोटो के लिए देखें 25+ कैप्शन

    15 August Instagram Captions: स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का दिन है. इस खास मौके पर लोग तिरंगे के साथ फोटो क्लिक करते हैं और उसे सोशल…

    Read more

    पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

    कभी-कभी इतिहास में कोई एक साल ऐसा आता है, जिसके असर को समझे बिना आने वाले दशकों की राजनीति समझना मुश्किल हो जाता है. पाकिस्तान के मामले में वह साल…

    Read more

    NATIONAL

    15 अगस्त पर Instagram Post को बनाएं यादगार, तिरंगे वाली फोटो के लिए देखें 25+ कैप्शन

    15 अगस्त पर Instagram Post को बनाएं यादगार, तिरंगे वाली फोटो के लिए देखें 25+ कैप्शन

    पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

    पाकिस्तान में कैसे ‘जिहाद’ बना State Policy? General Zia ने 1979 में बदली रणनीति, तैयार हुआ ‘Proxy War’ का मॉडल

    होर्मुज पर ट्रंप की ‘स्टील की दीवार’ वाले दावे को ईरान ने नकारा, कहा- शर्तें माने अमेरिका तभी खुलेगा रास्ता

    होर्मुज पर ट्रंप की ‘स्टील की दीवार’ वाले दावे को ईरान ने नकारा, कहा- शर्तें माने अमेरिका तभी खुलेगा रास्ता

    2007 वाला करिश्मा दोहराएंगी मायावती? यूपी में अखिलेश-योगी के बीच BSP का ‘कमबैक प्लान’ तैयार!

    2007 वाला करिश्मा दोहराएंगी मायावती? यूपी में अखिलेश-योगी के बीच BSP का ‘कमबैक प्लान’ तैयार!

    रवि किशन के ‘मौन व्रत’ पर CM योगी की चुटकी, दावत का जिक्र कर मंच से पूछ लिया ऐसा सवाल… सब रह गए हैरान

    रवि किशन के ‘मौन व्रत’ पर CM योगी की चुटकी, दावत का जिक्र कर मंच से पूछ लिया ऐसा सवाल… सब रह गए हैरान

    रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा!

    रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा!