Ro no D15139/23

रूस से तेल खरीदेगा या नहीं भारत? ट्रंप के ‘सीक्रेट’ समझौते वाले दावे पर पुतिन के ऑफिस से आया जवाब

India Russia Oil Trump Claim: रूस ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि उसे भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस चौंकाने वाले दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा.

क्रेमलिन का जवाब: ‘हमें दिल्ली से कोई मैसेज नहीं मिला’

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मॉस्को को अब तक भारत सरकार की तरफ से ऐसा कोई औपचारिक संदेश नहीं मिला है. पेसकोव ने जोर देकर कहा कि फिलहाल, रूसी तेल खरीद को रोकने के बारे में हमारे पास भारत की ओर से कोई जानकारी नहीं है. हमारे लिए भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण है और हम इसे और मजबूत करना चाहते हैं.

रूस ने यह भी साफ किया कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं हैं. भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग है, जिसे रूस हर दबाव के बावजूद बनाए रखना चाहता है.

ट्रंप ने क्या दावा किया था?

सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप के अनुसार:

भारत अब रूस की जगह अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा.

इसके बदले में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 50% से घटाकर 18% कर दिया है.

ट्रंप का मानना है कि इस कदम से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी क्योंकि इससे रूस की कमाई कम हो जाएगी.

भारत सरकार की चुप्पी 

भले ही ट्रंप ने अपनी ओर से बड़ी बातें कह दी हों, लेकिन भारत सरकार ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है. भारतीय विदेश मंत्रालय या तेल मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि रूस से तेल पूरी तरह बंद होगा.

विशेषज्ञों का कहना है:

भारत हमेशा अपनी एनर्जी पॉलिसी (ऊर्जा नीति) में संतुलन बनाकर चलता है.

रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए बहुत जरूरी रहा है.

भारत वर्तमान में रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है, जो हर रोज लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बड़ी बातें

3 फरवरी 2026 को साइन हुई इस डील के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

टैरिफ में कटौती: अमेरिका ने भारतीय प्रोडक्ट्स (जैसे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान) पर टैक्स 50% से घटाकर 18% कर दिया है.

भारत का वादा: ट्रंप के मुताबिक भारत भी अमेरिकी सामानों पर लगने वाली बाधाओं और टैक्स को धीरे-धीरे जीरो (0) कर देगा.

बड़ा निवेश: ट्रंप ने दावा किया कि भारत अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक और खेती के क्षेत्र में 500 बिलियन डॉलर से ज्यादा की खरीदारी करेगा.

  • Related Posts

    लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाना समाधान नहीं — मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

        लखनऊ | 19 जुलाई 2026 लखनऊ के भारतीय ट्वेल्वर शिया इस्लामी विद्वान, वक्ता एवं लेखक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता…

    Read more

    बेलगावी, कर्नाटक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक

                                             10,11 एवं 12 जुलाई 2026 12 जुलाई 2026, बेलगावी, कर्नाटक…

    Read more

    NATIONAL

    लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाना समाधान नहीं — मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

    लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाना समाधान नहीं — मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

    बेलगावी, कर्नाटक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक

    बेलगावी, कर्नाटक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक

    भारत पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, लिंडसे ग्राहम ने दिया था 500 प्रतिशत का प्रस्ताव

    भारत पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, लिंडसे ग्राहम ने दिया था 500 प्रतिशत का प्रस्ताव

    पोलैंड के मंत्री का दावा : पीएम मोदी ने यूक्रेन में परमाणु हमले को रोका, पुतिन ने मानी भारत की बात

    पोलैंड के मंत्री का दावा : पीएम मोदी ने यूक्रेन में परमाणु हमले को रोका, पुतिन ने मानी भारत की बात

    धार्मिक नगरी वृंदावन की बदलेगी तस्वीर, सीवर समस्या दूर करने के लिए खर्च होंगे 240 करोड़

    धार्मिक नगरी वृंदावन की बदलेगी तस्वीर, सीवर समस्या दूर करने के लिए खर्च होंगे 240 करोड़

    (अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषण) युद्धविराम का मिथक और वैश्विक शांति का संकट। विश्व ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का दौर।

    (अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषण) युद्धविराम का मिथक और वैश्विक शांति का संकट। विश्व ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का दौर।