
रायपुर, 30 मई 2026/छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सुशासन’ की परिकल्पना धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत राजपुर में धरातल पर साकार होती दिखाई दी। ‘सुशासन तिहार 2026’ के तहत आयोजित क्लस्टर स्तरीय समाधान शिविर आम जनता के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ। शिविर में न सिर्फ ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया, बल्कि कुल 872 आवेदनों में से 603 का मौके पर ही त्वरित निराकरण कर जनता को बड़ी राहत दी गई।
*14 गांवों के ग्रामीणों की उम्मीदों का केंद्र बना राजपुर*
इस विशाल समाधान शिविर में राजपुर क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली 14 ग्राम पंचायतों (राजपुर, झाझरकेरा, बोरसी, भोथा, लड़ेर, पाहंदा, सोनेवारा, सरगी, डाभा, करेली छोटी, छिपली, मोहंदी, बेलोरा और सोनपैरी) के ग्रामीण अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर पहुंचे थे।
शिविर के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 872 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 869 मांग संबंधी और 03 शिकायत संबंधी थे। प्रशासन की मुस्तैदी का आलम यह रहा कि इनमें से 601 मांग और 02 शिकायतों का तत्काल निपटारा कर दिया गया। वहीं, शेष बचे आवेदनों पर समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
*स्टॉलों पर बरसीं सौगातें: किसी को मिली ट्राईसिकल, तो किसी को राशन कार्ड*
शिविर में केवल कागजी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के हाथों में सौंपा गया। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही।
जनपद पंचायत मगरलोड द्वारा 05 परिवारों को नए राशन कार्ड सौंपे गए। समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिव्यांग हितग्राही को ट्राईसिकल प्रदान कर उनके जीवन की राह आसान की गई। इसी तरह श्रम विभाग की ओर से 04 श्रमिकों को उनके श्रम कार्ड वितरित किए गए। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर 65 ग्रामीणों का मुफ़्त स्वास्थ्य परीक्षण कर सिकल सेल, बीपी, शुगर और मौसमी बीमारियों की जांच की गई। इसके साथ ही 5 बुजुर्गों को आयुष्मान वय वंदन कार्ड वितरित किए गए। परिवहन विभाग ने मौके पर ही 15 ग्रामीणों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाए, जबकि 07 लोगों की पहचान संबंधी डिजिटल अपडेशन (नवीन एवं सुधार) के कार्य पूरे किए गए।
*”गाँव में ही सरकार”: ग्रामीणों के खिले चेहरे*
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने शासन की इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। उनका कहना था कि पहले जिन कामों के लिए उन्हें ब्लॉक और जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे, वे काम आज उनके गांव के भीतर ही एक छत के नीचे चुटकियों में हो गए। प्रशासन की इस त्वरित कार्यशैली से ग्रामीणों में एक नया विश्वास जगा है।









