
अभियान के तहत विशेष रूप से अंदरूनी दुर्गम एवं पहाड़ी बसाहटों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को गर्मी के दौरान पेयजल की उपलब्धता हो सके। इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें महिला शक्ति भी अहम भूमिका निभा रही है। राज्य शासन द्वारा नियुक्त महिला हैंडपंप तकनीशियन गांव-गांव पहुंचकर न सिर्फ हैंडपंपों की मरम्मत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीणों को जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। यह अभियान ना केवल पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता और महिला सशक्तिकरण का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
मुख्य अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी बस्तर परिक्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक जिले में 2 से 3 मोबाइल संधारण वाहन तैनात किए गए हैं। इन वाहनों में तकनीकी टीम के साथ जीआई पाइप, रॉड एवं अन्य आवश्यक स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध हैं, जिससे शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंचकर त्वरित मरम्मत की जा रही है। अभियान के तहत अब तक कुल 1273 हैंडपंपों का सुधार किया जा चुका है, जिसमें बस्तर मंडल में 856 तथा कोंडागांव मंडल में 417 हैंडपंपों की मरम्मत शामिल है। वर्तमान में यह अभियान निरंतर जारी है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नंबर 1916 जारी किया गया है, जिसके माध्यम से ग्रामीण सीधे सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा सरपंच, सचिव एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा मोबाइल के जरिए भी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जिन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
इसके साथ ही आवश्यकता वाले गांवों एवं बसाहटों में नए नलकूप खनन कर हैण्डपम्प स्थापित किए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए पूरे बस्तर संभाग में कुल सात नलकूप खनन वाहन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।









