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हिंदू युवक को भीड़ ने फैक्ट्री से घसीटा, वीडियो में हुआ खुलासा, दीपू को बचाने में क्यों नाकाम रही पुलिस; बताई ये लाचारी

बांग्लादेश में मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई नृशंस हत्या के मामले में अब ऐसे वीडियो सामने आया है. इसमें साफ दिख रहा है कि भीड़ दीपू को फैक्ट्री से सीधे ले जाते हुए दिख रही है. तस्लीमा नसरीन ने इसका वीडियो शेयर किया है. इस घटना में दीपू को न बचा पाने पर पुलिस ने ट्रैफिक को जिम्मेदार बताय है.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा एक बार फिर सवालों के घेरे में है. मैमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई नृशंस हत्या के मामले में अब ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जो उस वक्त की भयावह सच्चाई को उजागर करते हैं. इन फुटेज से साफ झलकता है कि घटना के समय पूरे इलाके में भीड़ का राज था और कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज मौजूद नहीं थी. दीपू चंद्र दास को जिंदा जला दिए जाने की घटना ने पूरे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब इस मामले में पुलिस की ओर से अपनी सफाई सामने आई है, जिसमें देरी से सूचना मिलने को इस त्रासदी की बड़ी वजह बताया गया है.

इस घटना से जुड़े वीडियो को प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि हिंदू-विरोधी तत्वों ने दीपू दास को सीधे उसकी फैक्ट्री से उठा लिया. उनके मुताबिक, दीपू ने कोई अपराध नहीं किया था. महज अफवाहों के चलते फ्लोर मैनेजर ने उससे इस्तीफा देने का दबाव बनाया और पुलिस को सूचना दिए बिना गेट खोल दिया, जिसके बाद भीड़ ने उसे पकड़ लिया. तस्लीमा नसरीन ने पुलिस की भूमिका पर भी तीखे सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि उत्सव मंडल के मामले में भी यही पैटर्न देखने को मिला था, पहले उसे पुलिस स्टेशन लाया गया और फिर अंततः पुलिस ने ही उसे भीड़ के हवाले कर दिया. तस्लीमा ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में जिहादियों और हिंदुओं के खिलाफ नफरत और हिंसा लगातार बढ़ रही है, जो न केवल अल्पसंख्यकों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

हत्या से पहले का वीडियो आया सामने

इस वीडियो को न्यूज ब्रॉडकास्टर जमुना टीवी द्वारा जारी किया गया है, जिसमें वह पल कैद है, जब दीपू चंद्र दास को भीड़ के हवाले किया गया. वीडियो में एक बड़े गेट के बाहर भारी संख्या में लोग जमा दिखते हैं, जो बेहद आक्रामक और उत्तेजित नजर आते हैं. कुछ ही पलों बाद जैसे ही गेट खुलता है, भीड़ दीपू को जबरन अपने साथ ले जाती दिखाई देती है. वीडियो देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वही फैक्ट्री परिसर है, जहां दीपू काम करता था और जहां से उसे घसीटकर बाहर निकाला गया.

ईशनिंदा के आरोप में भीड़ का कहर

गुरुवार को दीपू चंद्र दास पर कथित ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने उसकी बेरहमी से पिटाई की. हत्या के बाद भी हिंसा नहीं रुकी. दीपू के शव को एक पेड़ से बांधा गया और फिर आग के हवाले कर दिया गया. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर पुलिस ने साहस दिखाया होता तो उसकी जान बच सकती थी. आरोप है कि पुलिस ने भीड़ का सामना करने के बजाय दीपू को उन्हीं लोगों के हवाले कर दिया, जो उसकी जान के दुश्मन बने हुए थे.

कोई सबूत नहीं, फिर भी हत्या

दीपू की मौत के बाद बांग्लादेशी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भीड़ द्वारा लगाए गए ईशनिंदा के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.  मैमनसिंह जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मोहम्मद फरहाद हुसैन खान ने कहा कि यदि समय रहते घटना की जानकारी मिल जाती, तो दीपू चंद्र दास की जान बचाई जा सकती थी. उनके मुताबिक, उन्हें इस घटना की सूचना रात करीब 8 बजे एक सहायक उप-निरीक्षक के माध्यम से मिली. जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके के लिए रवाना हुई, लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे.

भीड़ और ट्रैफिक बना बड़ी बाधा

एसपी फरहाद हुसैन के अनुसार, घटना स्थल की ओर जाते समय सड़कों पर सैकड़ों लोग जमा थे और रास्ता पूरी तरह जाम था. जिस इलाके में वारदात हुई, वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया था. पुलिस जब फैक्ट्री के गेट तक पहुंची, तब तक दीपू की हत्या की जा चुकी थी. उन्होंने बताया कि उस समय उग्र भीड़ दीपू चंद्र दास के शव को ढाका-मैमनसिंह रोड पर ले जा रही थी, जबकि पुलिस करीब दो किलोमीटर पीछे फंसी हुई थी. सड़क पर लगभग 10 किलोमीटर लंबा जाम लगा था, जिसके कारण पुलिस तीन घंटे तक वहीं अटकी रही. इस वजह से कानूनी एजेंसियों की कार्रवाई में गंभीर देरी हुई.

नजदीकी थाने ने क्यों नहीं दी सूचना?

एसपी ने यह भी बताया कि उनका कार्यालय घटनास्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर था, जबकि भाकुला पुलिस स्टेशन वहां से काफी नजदीक स्थित है. उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय पुलिस को समय रहते सूचना दी जाती, तो हालात काबू में लाए जा सकते थे. हालांकि, पुलिस के अनुसार फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक कोई औपचारिक शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई है.

फैक्ट्री प्रबंधन की सफाई

इस मामले में फैक्ट्री पायनियर निटवियर्स के सीनियर मैनेजर साकिब महमूद ने बताया कि घटना वाले दिन शाम करीब 5 बजे फैक्ट्री के भीतर कुछ मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन और हंगामा शुरू कर दिया था. उनका आरोप था कि दीपू चंद्र दास ने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. समय के साथ भीड़ बढ़ती चली गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. बताया गया है कि फैक्ट्री के एक मैनेजर आलमगीर हुसैन ने दीपू का एक फर्जी इस्तीफा तक तैयार कर दिया और यह दावा किया कि उसे नौकरी से हटा दिया गया है. फिर भी उग्र भीड़ शांत नहीं हुई और हिंसा जारी रही.

पुलिस को सूचना देने में देरी क्यों हुई, इस सवाल पर फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि वे अपने स्तर पर लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन हालात उनके नियंत्रण से बाहर हो गए और इसी प्रयास में पुलिस को सूचना देने में देर हो गई. इस देरी ने हालात को और भयावह बना दिया और एक निर्दोष युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी.

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