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नवा रायपुर में “मेरे राम महाकाव्य” का ऐतिहासिक विमोचन राष्ट्रीय स्तर की विभूतियों की गरिमामय उपस्थिति से सजा साहित्यिक महोत्सव

नवा रायपुर की पावन धरती पर आयोजित एक भव्य एवं ऐतिहासिक साहित्यिक समारोह में दार्शनिक-कवि श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह बघेल द्वारा रचित महाकाव्य “मेरे राम महाकाव्य” का लोकार्पण अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक ग्रंथ-विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और काव्य-परंपरा के नवजागरण का सशक्त साक्षी बना।
इस गौरवशाली आयोजन में देश की राजनीति, साहित्य और सिनेमा जगत की प्रतिष्ठित विभूतियों ने मंच साझा कर इस महाकाव्य को समाज को समर्पित किया तथा इसे समकालीन भारत के लिए एक वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर बताया।
महाकाव्य “मेरे राम महाकाव्य” का विमोचन
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, प्रख्यात लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री राम माधव जी के कर-कमलों से,
महाभारत धारावाहिक में श्रीकृष्ण के अमर चरित्र को जीवंत करने वाले सुप्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक एवं निर्माता श्री नितीश भरद्वाज जी,
तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं त्रिपुरा, झारखंड व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस जी,
छत्तीसगढ़ राज्य साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा जी,
और छत्तीसगढ़ प्रदेश कार्यालय प्रभारी सोशल मीडिया भारतीय जनता पार्टी श्री अभिजीत पाण्डेय जी
की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने “मेरे राम महाकाव्य” को समकालीन समाज के लिए आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति का सशक्त दर्पण बताया। उन्होंने कहा कि यह कृति मात्र साहित्यिक सृजन नहीं, बल्कि मर्यादा, कर्तव्य, करुणा और धर्म के शाश्वत आदर्शों का दार्शनिक पथप्रदर्शक है, जो आज के वैचारिक रूप से भटके समाज को दिशा देने की सामर्थ्य रखता है।
दार्शनिक कवि श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह बघेल के सुपुत्र एवं उद्योगपति इंजीनियर ज्ञानेंद्र सिंह बघेल ने भावुक शब्दों में कहा—
“‘मेरे राम महाकाव्य’ बाबूजी की लगभग बीस वर्षों की तपस्यमय साधना का साकार रूप है। इस महाकाव्य के माध्यम से उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अनुकरणीय जीवन-आदर्शों को आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मसात कर प्रस्तुत किया है। यह रचना उनके अंतर्मन की साधना, चिंतन और अनुभूति का दिव्य प्रतिफल है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, लेखक, कवि, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस महाकाव्य को हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण, युगद्रष्टा और कालजयी उपलब्धि बताया।
दीर्घ काल तक साधना-पथ पर अग्रसर रही इस महाकाव्य-रचना का यह भव्य विमोचन साहित्यिक जगत के लिए नवचेतना का उद्घोष बनकर सामने आया।
उल्लेखनीय है कि “मेरे राम महाकाव्य” का संगीतबद्ध गायन भी किया जा रहा है, जिसके चयनित एपिसोड YouTube पर “mereramepic” चैनल पर उपलब्ध हैं, जहाँ काव्य और संगीत का अद्भुत संगम श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर रहा है।

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