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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हाइड्रो रॉकेट कार्यशाला एवं विशेष नाइट स्काई गेजिंग कार्यक्रम सम्पन्न

रायपुर, 28 फरवरी 2026 (IMNB NEWS AGENCY) राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हाइड्रो रॉकेट कार्यशाला एवं विशेष नाइट स्काई गेजिंग कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी 2026 के अवसर पर 1 हाइड्रो रॉकेट कार्यशाला तथा 2 नाइट स्काई गेजिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर (RSC) एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी परिषद (CCOST) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, दलदल सिवनी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, बरौदा, पी. एम. श्री. भरत देवांगन शासकीय उत्कृष्ठ विद्यालय, खरोरा, ब्रईटन स्कूल, नरदहा एवं शासकीय विद्यालय, आमासिवनी के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही। छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर (RSC) एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी परिषद (CCOST) के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ श्री एम. के. बेग, वैज्ञानिक (E-1) ने किया गया। अपने प्रेरणादायी उ‌द्घाटन उ‌द्बोधन में उन्होंने महान वैज्ञानिक डॉ. सी. वी. रमन की ऐतिहासिक खोज “रमन प्रभाव” को भारतीय विज्ञान की वैश्विक पहचान का आधार बताते हुए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल ज्ञान का विषय नहीं, बल्कि नवाचार, तर्कशीलता और राष्ट्र निर्माण की सशक्त धुरी है।

श्री बेग ने अपने वक्तव्य में संसाधन उपग्रह (Resource Satellite) एवं रिमोट सेंसिंग तकनीक की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि आज उपग्रह आधारित आंकड़ों के माध्यम से कृषि उत्पादन का आकलन, जल संसाधनों का मानचित्रण, वन क्षेत्र की निगरानी, आपदा पूर्वानुमान एवं शहरी नियोजन जैसे कार्य अत्यंत प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं। उन्होंने वि‌द्यार्थियों से आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक सोच को अपनाकर अंतरिक्ष प्रौ‌द्योगिकी एवं उभरते शोध क्षेत्रों में सक्रिय सहभागिता करें और भारत को वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।

कार्यशाला का आयोजन ISRO के पंजीकृत स्पेस ट्यूटर संस्था के तकनीकी सहयोग से किया गया। उनके द्वारा रॉकेट विज्ञान के मूल सि‌द्धांतों को सरल, व्यावहारिक एवं संवादात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया, जिससे विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को रॉकेट विज्ञान के मूल सि‌द्धांतों से परिचित कराया तथा रॉकेट प्रक्षेपण के वैज्ञानिक आधार को सरल एवं संवादात्मक शैली में समझाया। लगभग 120 विद्यालयी विद्यार्थियों ने कार्यशाला का लाभ प्राप्त किया। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण हाइड्रो रॉकेट का प्रत्यक्ष प्रक्षेपण रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने वायु दाब, भ्रस्ट तथा न्यूटन के तृतीय गति नियम जैसे सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से समझा। इस प्रत्यक्ष प्रदर्शन ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ किया एवं अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति उनकी रुचि को बढ़ाया।

डॉ. शिरीष कुमार सिंह, परियोजना निदेशक (प्रभारी), ने भी कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद स्थापित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता एवं नवाचार की भावना अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जिज्ञासा ही खोज का प्रथम चरण है। उन्होंने युवाओं को विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

प्रातःकालीन सत्र में एक्सपोज़र विज़िट हेतु आए वि‌द्यार्थियों को विशेष सोलर फिल्टर युक्त दूरबीन के माध्यम से सूर्य कलंकों (Sunspots) का सुरक्षित एवं प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। विशेषज्ञों द्वारा सूर्य की संरचना, उसकी सतह पर होने वाली गतिविधियों तथा सूर्य कलंकों के वैज्ञानिक महत्व की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों ने यह समझा कि सूर्य की सतह पर दिखाई देने वाले ये गहरे धब्बे वास्तव में उच्च चुंबकीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। इस प्रत्यक्ष अवलोकन ने उनकी जिज्ञासा को और अधिक प्रोत्साहित किया तथा खगोल विज्ञान के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझने का अनूठा अवसर प्रदान किया।

सायंकाल आयोजित “प्लानेटरी परेड” (Planetary Alignment) कार्यक्रम में वि‌द्यार्थियों एवं आम जनमानस ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। दूरबीन एवं टेलीस्कोप के माध्यम से ग्रहों की विशेष स्थिति का अवलोकन कराया गया, जहाँ विशेषज्ञों ने ग्रहों की पहचान, उनकी कक्षीय गति, चमक एवं आकाश में उनकी स्थिति के वैज्ञानिक कारणों को सरल भाषा में समझाया। प्रतिभागियों ने आकाशीय पिंडों को प्रत्यक्ष देखकर सौरमंडल की संरचना को अधिक स्पष्ट रूप से समझा। आकाश दर्शन सत्र ने उपस्थित जनसमूह में अद्भुत उत्साह, रोमांच एवं वैज्ञानिक जिज्ञासा का संचार किया तथा पूरे कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं स्मरणीय बना दिया। यह आयोजन सैद्धांतिक ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव का उत्कृष्ट समन्वय रहा, जिसने युवाओं को विज्ञान एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया।

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