
Bhadrapada Maas 2026 Rules: भाद्रपद हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला महीना है. इसे भद्र परिणाम देने वाले व्रतों और धार्मिक नियमों का मास माना जाता है. इस दौरान व्रत, उपवास, संयम और निष्ठा का पालन करने से मन को शुद्ध करने और सकारात्मक भाव विकसित करने में सहायता मिलती है. अपनी गलतियों पर विचार कर प्रायश्चित और आत्मचिंतन के लिए भी यह महीना महत्वपूर्ण माना जाता है. भाद्रपद में पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है.
भाद्रपद मास 2026 कब से कब तक?
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में भाद्रपद मास 29 अगस्त 2026 से 26 सितंबर 2026 तक रहेगा. वहीं दक्षिण भारत के अमांत पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास 12 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक माना जाएगा.
भाद्रपद मास के नियम और सावधानियां
इस महीने में खान-पान और दिनचर्या से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की परंपरा है. कच्ची चीजों के सेवन से बचने और दही का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है. रक्तचाप बढ़ने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ठंडे पानी से सुबह-शाम स्नान करने से आलस्य दूर करने में मदद मिल सकती है. श्रीकृष्ण को तुलसी दल अर्पित करना भी शुभ माना गया है.
भाद्रपद मास के प्रमुख त्योहार
भाद्रपद में कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व आते हैं. इस महीने गणेश चतुर्थी और गणेश महोत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, बलराम और राधा जन्मोत्सव, हरितालिका तीज तथा अनंत चतुर्दशी जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं. इन अवसरों पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने की विशेष मान्यता है.
श्रीकृष्ण की कृपा पाने के उपाय
भाद्रपद में को पंचामृत से स्नान कराने की परंपरा शुभ मानी जाती है. संतान सुख की कामना रखने वाले भक्त कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल हो सकते हैं. आत्मविश्वास और सकारात्मकता के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना लाभकारी माना जाता है. घर में लड्डू गोपाल और शंख की स्थापना भी शुभ फलदायी मानी जाती है.
भगवान गणेश को प्रसन्न करने के उपाय
विद्या, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति के लिए भाद्रपद में की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है. पीले रंग के गणेशजी की स्थापना कर प्रतिदिन दूर्वा और मोदक अर्पित करें. पूरे महीने सात्विक आचरण और संयम बनाए रखने से गणेशजी की कृपा प्राप्त होने तथा जीवन की बाधाएं दूर होने की धार्मिक मान्यता है.









