
दिलचस्प मगर दुखद खबर है कि बिहार के एक मंत्री को नाराज जनता ने मेन रोड पर दिन-दहाड़े दौड़ा दिया। जनता मंत्री जी के भ्रष्टाचार और पक्षपातपूर्ण रवैये से नाराज थी। ये कोई बड़ी बात नहीं है। यदि भ्रष्टाचार न करे, यदि भाई-भतीजों को लाभ न पहुंचाए तो फिर मंत्री बनने का फायदा ही क्या ? फिर राजनीति ही क्यों करनी ?
अगर जेल जाने से अच्छा है कि पैसा हो तो दाल मिल लगाओ, अधिकारियों के कोप से बचने के लिये उन्हें रिश्वत दो और बढ़िया पैसा कमाओ। सुकून से जियो। ये ईडी, ये सीबीआई की तलवार तो नहीं लटकेगी। और उपर से ये खतरा कि जनता अब सड़कों पर दौड़ाने भी लगी है।
वो दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ में भी बेईमानों को लतियाएगी जनता।
हम तो माल कमाएंगे जेल में रहकर भी सरकार चलाएंगे
हमें बेईमानी करने की छूट दो, बेईमानी करने पर भी पद से मत हटाओ, ऐसे कड़े कानून संशोधन मत लाओ, ये नारे हैं दूसरे शब्दों में विपक्ष के।
कोई गहरा विश्लेषण करने की जरूरत नहीं है। आराम से सरसरी निगाह से देखने पर भी दिखता है, थोड़ा सोचने पर समझ में आ जाता है कि अधिकांश विपक्षी नेता धुंआधार भ्रष्टाचार मे फंसे हैं। पूरी तरह बेईमानी में धंसे हैं।
कई तो भ्रष्टाचार के अपराध में जेल भी काट चुके हैं और कई लाईन में लगे हैं, जेल जाएंगे।
इस धंधे से विरक्ति होगी अब लोगों को
वास्तविकता ये है कि ये बेईमानी का बाजार अब सूना होने वाला है राजनैतिक मैदान साफ होने वाला है। राजनीति में बहुत सी जगह खाली होने वाली है। क्योंकि जब ये बिल पास हो जाएगा कि पांच साल की सजा वाले केस में पकड़े जाने पर 30 दिन के अंदर इस्तीफा देना होगा तो राजनीति करने से लोग डरने लगेंगे।
ऐसा इसलिये होगा कि अब बेईमानी करके बचना बहुत कठिन हो गया है। अभी तक तो ऐसा था कि ढेर सी बेईमानी करो और फिर किसी राजनैतिक नेता को आका बनाकर, हिस्सा देकर राजनीति में प्रवेश कर लो। बस फिर ऐशी ही ऐश हैं।
पर अब तो सूचना का अधिकार, मौजूदा सरकार का भ्रष्टाचार विरोधी रूख और ज्योतिष के हिसाब से शनिदेव का सजा देने पर आमदा होना अब राजनीेति से दो नंबर का पैसा कमाने में बड़ा बाधक बन गया है।
ये जो संविधान संशोधन विधेयक है इसमें दोनों सदनों में अलग-अलग पास कराने के लिये थोड़ा समय लग सकता है। दोनों सदनों में भाजपा को दो तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं है। राज्यसभा में तो साधारण बहुमत भी नहीं है।
लेकिन राजनैतिक पण्डित और अनुभवी लोग जानते हैं कि इस सबके उपर है मोदी-शाह की इच्छा शक्ति, सरकार का दृढ़ संकल्प। ऐसे कई कठिन लक्ष्य पहले भी इस सरकार ने साधे हैं।
ये बिल पास होते ही मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री लगातार 30 दिन जेल में रह गये तो इस्तीफा अनिवार्य है। सही भी है कोई भी सरकारी अधिकारी अगर 48 घंटे कस्टडी में रह गया तो उसे सस्पेण्ड कर दिया जाता है तो नेताओं को ये छूट क्यों मिलनी चाहिये।
————————–

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








