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एक मौत के बदले एमएमआई को ‘एक पान न खाने’ का जुर्माना, 85 फीसदी डाॅक्टर नरपिशाच, जल्लाद वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…..

दस साल पहले एक समारोह में बोलते हुए बिहार के आरजेडी नेता सांसद पप्पू यादव ने कहा था कि 85 प्रतिशत डाॅक्टर नरपिशाच हैं। उन्होंने सरकारी डाॅक्टर्स की प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक की मांग की थी और प्राईवेट डाॅक्टर्स की और उनकी जांचों की फीस तय करने की मांग भी की थी।

पप्पू यादव एक दमदार सांसद हैं और अपने तीखे तेवरों के लिये जाने जाते हैं।

लेकिन अफसोस कि उनकी बात को देश ने हवा में उड़ा दिया। उनकी एक भी मानवीय मांग मानी नहीं गयी। आज भी जंब कोई किसी प्राईवेट हाॅस्पिटल में भर्ती होता है तो उससे पहले से पंद्रह-बीस हजार जमा करवा लिये जाते हैं।

अगर वो बच गया तो भी और मर गया तो भी उसके परिजनों से लाखों रूप्ये बिल के वसूले जाते हैं। इन लाखों रूप्यों का कोई हिसाब नहीं होता।

कमरे का किराया, जांच का बिल, मशीन का चार्ज कुछ भी उल्लेख नहीं किया जाता और दुखी, लुटे-पिटे परिजनों की हिम्मत भी नहीं होती कि उनसे डिटेल पूछे।

क्योंकि सारा शासन प्राईवेट हाॅस्पिटल के इशारों पर काम करता है। उनका कोई बाल भी बांका नही कर सकता। वे मानव सेवा के नाम पर डकैती का काम करते हैं।

एक मौत का जुर्माना बीस हजार,

भारती नहीं, मर गयी मानवता

पिछले साल सितंबर में टाटीबंद, रायपुर निवासी मुकेश खेमानी की पत्नी को एमएमआई नारायणा हाॅस्पिटल मे भर्ती कराया गया। जैसा कि आम तौर पर होता है, हाॅस्पिटल ने बीमारी पर काबू न पाने के बावजूद इलाज जारी रखा अपनी वसूली की और फिर हैदराबाद ले जाने की सलाह दे डाली।

परेशान खेमानी परिवार को एयर एम्बूलेंस मंगवाकर दी जिसमें मरीज को ले जाना था। आरोप लगाया गया कि उस एम्बूलेंस में कोई डाॅक्टर नहीं था, अन्य सुविधाएं नहीं थी और आॅक्सीजन तक नहीं था। नतीजा ये निकला कि थोड़ी देर बाद मरीज की जान चली गयी।

पहले एमएमआई ने

फिर प्रशासन ने शर्मसार किया

खेमानी परिवार ने रो-रोकर गुहार लगाई और साफ तौर पर एमएमआई नारायणा को इस मौत के लिये जवाबदार ठहराया।

हाॅस्पिटल पर आरोपों की जांच की गयी जिसमें हाॅस्पिटल की गलती पाई गयी जिससे भारती खेमानी की जान गयी। हाॅस्पिटल पर लगे गंभीर लापरवाही के लिये कलेक्टर ने बीस हजार का भारी-भरकम जुर्माना लगा दियां। साथ ही एक महीने के अंदर जवाब मांगा है कि हास्पिटल का लाईसेंस क्यांे निरस्त नहीं कर दिया जाए।

नगर में इस समय चारों ओर इस जुर्माने की चर्चा है। एक इंसान की जान चली गयी और जुर्माना मात्र बीस हजार रूप्ये जो इस रईस प्रबंधन के लिये एक पान खाने के बराबर है। ऐसा लगता है जैसे कलेक्टर महोदय ने प्रबंधन पर एक पान न खाने की फाईन की है। बेहद शर्मनाक… घोर अमानवीय…. ।

ऐसा लगता है भारती नहीं मानवता मर गयी है।

चर्चा यह भी है कि एमएमआई नारयणा को अदालत से स्टे मिल जाएगा जिससे उसका लाईसेंस निरस्त नहीं होगा। हाॅस्पिटल बदस्तूर चलती रहेगी।

रामायण में लिखा है कि समरथ को नहीं दोष गोसाईं’। किसी भी समर्थ और शक्तिशाली को किसी भी बात के लिये दोषी नहीं ठहराया जाता है, यही दस्तूर है।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषकमोबा. 9522170700‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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