पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश ही नहीं विदेश में प्रोफेसर डॉक्टर मधु वत्स का नाम ख्याति प्राप्त कर रहा है प्रधान मंत्री मोदी सहित केंद्रीय मंत्री गडकरी मुख्यमंत्री योगी ने भी सराहा

प्रोफेसर श्रीमती मधु वत्स (पर्यावरणविद, शिक्षाविद) – पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र        0 लेख लक्ष्मी ठाकुर प्रस्तुति

डॉ. मधु वत्स, जिनका जन्म 28 फरवरी को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ, एक प्रख्यात पर्यावरणविद, विदुषी, शिक्षिका, शोधकर्ता, समाजसेवी और प्रोफेसर हैं। उन्होंने 2005 से 2021 तक पर्यावरण संतुलन, प्रकृति संरक्षण, बागवानी, भूमि उर्वरता और स्वच्छता, मूल्य शिक्षा और राष्ट्रीयता पर आधारित कई किताबें लिखीं और सैकड़ों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित किए। उनके लेखन और शोध कार्य ने न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में पहचान बनाई है।
डॉ. वत्स सर्वहित कल्याण सेवा समिति” की संस्थापक और अध्यक्ष हैं, जो एक राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जो पर्यावरण संतुलन, महिलाओं का सशक्तिकरण और राष्ट्रीयता के लिए काम करता है। इसके अलावा, वे “हरित पर्याय” नामक एक प्रसिद्ध त्रैमासिक पत्रिका की प्रधान संपादक भी हैं। उनके द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध किताबों में “पर्यावरण प्रदूषण और सुधार के कदम” (2015), “महिला संचार और सूचना प्रौद्योगिकी” (2015), “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन” (2016), “जल संरक्षण: पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण” (2019) जैसी किताबें शामिल हैं।
वे महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय (नोएडा), मेवाड़ विश्वविद्यालय (चित्तौड़गढ़), वेणकेटेश्वरा विश्वविद्यालय (मुरादाबाद), और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (मेरठ) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रोफेसर और शोध मार्गदर्शक के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. वत्स ने महिला और बाल विकास, विशेष रूप से निराश्रित महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए भी निरंतर काम किया है।
डॉ. वत्स ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सदस्य के रूप में कार्य किया है, जैसे “विशाखा समिति”, “दिशा समन्वय समिति”, “गंगा संरक्षण समिति”, और “पीजीपीएनडीटी – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” आदि। उनके द्वारा किए गए कार्यों के कारण उन्हें “नारी-शक्ति सम्मान”, “प्रकृति प्रहरी सम्मान”, “ग्रीन पीस अवार्ड”, और “गंगा हरितिमा सम्मान” जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है।
वे कई महान कार्यों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “मन की बात” में भी उल्लेखित हो चुकी हैं। डॉ. वत्स का जीवन पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और समाज कल्याण के लिए समर्पित है, और उनका कार्य हमें प्रेरित करता है कि हम अपनी पृथ्वी और समाज के लिए और अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण बनें।

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