
ISKCON: राधारमण दास को कोलकाता इस्कॉन के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. उन्होंने खुद एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. फिलहाल उन्हें इस्कॉन की सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है. उन्हें मीडिया, सरकारी अधिकारियों या किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस्कॉन या संगठन का प्रतिनिधित्व करने से भी रोक दिया गया है.
बांग्लादेश के खिलाफ देते रहे हैं बयान
बयान में राधारमण ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें जो कारण बताये हैं, उनमें से एक बांग्लादेश में हिंदुओं और इस्कॉन भक्तों पर अत्याचार के मुद्दे पर उनके सार्वजनिक बयान और मीडिया को इंटरव्यू देना है. इसके अलावा उनका दावा है कि बांग्लादेश में कैद चिन्मयकृष्ण दास के समर्थन में उनकी सार्वजनिक राय भी उनके खिलाफ कार्रवाई के कारणों में से एक है.
मेनका गांधी को भेजी थी लीगल नोटिस
इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा नेता मेनका गांधी के खिलाफ लीगल नोटिस भेजना भी एक कारण है. उन्होंने यह भी कहा कि कॉमेडियन सुरलीन कौर के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज कराना, सनातन धर्म के पक्ष में सार्वजनिक रूप से स्टैंड लेना, 1976 की न्यूयॉर्क रथ यात्रा के साथ डोनाल्ड ट्रंप के ऐतिहासिक संबंध के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करना और एक टेलीविजन इंटरव्यू में हिस्सा लेना भी इस फैसले के पीछे के कारण हैं.
इस्कॉन के फैसले का करेंगे सम्मान
उन्होंने आगे कहा कि इस्कॉन अधिकारियों के फैसले का सम्मान करेंगे और भविष्य में उनके निर्देशों का पालन करेंगे. उन्होंने कहा- अब से मैं मीडिया में इस्कॉन की ओर से कोई बयान नहीं दूंगा या सार्वजनिक रूप से संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं करूंगा. राधारमण दास का पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से करीबी रिश्ते की चर्चा लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में है. उन्हें राज्य में कई सरकारी और धार्मिक कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री के बगल में देखा गया है. दीघा में जगन्नाथ मंदिर की स्थापना के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं.









