विकसित भारत के लिए स्वदेशी अपनाना जरूरी

आत्मनिर्भर भारत की कल्पना भारत को दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बना सकती है. स्वदेशी का एकमात्र विकल्प आत्मनिर्भर भारत है. जितना संभव हो, उतना स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए क्योंकि एक आत्मनिर्भर समाज ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकता है.

Swadeshi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का संकल्प लिया है और इसे पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. आत्मनिर्भर भारत की कल्पना भारत को दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बना सकती है. वर्ष 2014 में जब देश की कमान मोदी ने संभाली तो भारत दुनिया की 11वें नंबर की अर्थव्यवस्था था और आज चौथे स्थान पर पहुंच गया है. जल्द ही भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा. आत्मनिर्भर भारत ही एकमात्र विकल्प स्वदेशी का है. जितना संभव हो, उतना स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए. जोधपुर में माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन एंड एक्सपो- 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात कही.

गृह मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार के दौरान निर्यात दोगुना हो चुका है. मैन्युफैक्चरिंग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 70 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है. दुनिया में होने वाले प्रति 100 डिजिटल लेन-देन में से 50 भारत में होते हैं. मोबाइल के क्षेत्र में हम दुनिया के दूसरे नंबर के उत्पादक बन गये हैं. स्टार्टअप के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है. दवाइयां बनाने और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी हम दुनिया में तीसरे नंबर पर है. उन्होंने कहा कि एक प्लेटफॉर्म बनकर तैयार है, जिसके जरिए देश की युवा पीढ़ी विश्वभर के युवाओं के साथ दो-दो हाथ करके आगे बढ़ सकती है. विकास के साथ मातृभाषा भी जरूरी है, लेकिन दुनिया में प्रगति के लिए जो भाषा बोलनी पड़े, वह बोलना और सीखना चाहिए.

आत्मनिर्भर समाज ही आत्मनिर्भर भारत का कर सकता है निर्माण 

अमित शाह ने कहा कि देश का सामाजिक ताना-बाना और मजबूत सामुदायिक संरचना राष्ट्रीय एकता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. सामुदायिक समारोह देश को बांटने की बजाय मजबूत करने का काम करते है. एक आत्मनिर्भर समाज ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकता है. माहेश्वरी समुदाय के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस समाज से निकले रत्नों ने इस देश को हर क्षेत्र में आभूषण पहने हुए व्यक्ति की तरह चमकाने का काम किया है. देश और विदेश में बहुत बड़े पदों पर पहुंचने और संस्थानों में उच्च स्वीकृति प्राप्त करने के बावजूद यदि कोई समाज अपने मूल से इतना गहराई से जुड़ा रहा है तो वह माहेश्वरी समाज ही है. इस समाज ने देश को जब जिस प्रकार की आवश्यकता पड़ी, उसी प्रकार से खुद को प्रस्तुत किया है. जब मुगलों के साथ युद्ध चल रहे थे, तब राजाओं-महाराजाओं के युद्ध के खजाने को भरने का काम माहेश्वरी समाज ने ही किया. अंग्रेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी जा रही थी, तो महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम का बहुत बड़ा हिस्सा आर्थिक रूप से माहेश्वरी समाज के सेठों ने दिया. आजादी के बाद देश को विकास के पथ पर आगे ले जाने का काम भी इस समाज ने किया. मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, वेल्थ जनरेशन और तकनीक का अपनाने में इस समाज का अहम योगदान रहा है

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