
Japan US Relations: जापान और अमेरिका के बीच पुरानी और बेहद मजबूत स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप है. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद से दोनों देश साझा सुरक्षा भावना के साथ काम कर रहे हैं. लेकिन चीन के एक वार से इसमें दरार आ सकती है. और वह भी तब, जब चीन इन दोनों में से किसी एक भी हमला नहीं करेगा. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने साफ कहा है कि अगर ताइवान को लेकर कोई बड़ा टकराव होता है और टोक्यो पूरी तरह किनारे हो जाता है, तो इससे जापान और अमेरिका की पुरानी सुरक्षा साझेदारी कमजोर पड़ सकती है. हालांकि, उन्होंने इस बार ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिससे यह लगे कि जापान खुद से आगे बढ़कर युद्ध में कूदने की बात कर रहा हो.
ताकाइची ने यह बात 26 जनवरी 2026 को एक लाइव टीवी कार्यक्रम में कही. वहां एक विपक्षी नेता ने उन पर चीन के साथ बेवजह तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया था. दरअसल, नवंबर में दिए गए उनके एक बयान के बाद से ही विवाद चल रहा है. उस समय ताकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान की सैन्य प्रतिक्रिया हो सकती है. इसके बाद बीजिंग ने निर्यात पर पाबंदियां लगाईं, उड़ानों को रद्द किया और तीखी बयानबाजी की.
चीनी राजदूत ने तो की बात तक कह दी थी. चीन बार-बार उनसे अपना बयान वापस लेने की मांग करता रहा है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान एक लोकतांत्रिक शासन वाला द्वीप है.
अब क्या बोलीं ताकाइची?
टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया. उनके मुताबिक, जापान खुद से युद्ध शुरू करने नहीं जाएगा. लेकिन अगर ताइवान में हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तो वहां फंसे जापानी और अमेरिकी नागरिकों को निकालना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में जापान और अमेरिका मिलकर कुछ कदम उठा सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिकी सेना जापान के साथ मिलकर काम कर रही हो और उस पर हमला हो जाए और जापान कुछ न करे, तो दोनों देशों का भरोसा टूट जाएगा. जापान-अमेरिका गठबंधन खत्म हो जाएगा. इसलिए जापान हालात देखकर और कानून की सीमा के अंदर रहकर फैसला करेगा. ताकाइची ने इससे ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं कहा.
चीन की प्रतिक्रिया
ने फिर जापान को चेतावनी दी है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि जापान को ताइवान के मुद्दे पर ‘गलत कदम’ उठाने से बचना चाहिए और हालात को और भड़काने वाली भाषा बंद करनी चाहिए.
जापान के कानून की सीमा
जापान का संविधान सीधे युद्ध या सैन्य कार्रवाई की इजाजत नहीं देता. दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने इस शांतिवादी संविधान में सेना की भूमिका सीमित रखी गई है. हालांकि, एक प्रावधान ऐसा भी है जिसमें कहा गया है कि अगर अमेरिका या किसी करीबी देश पर हमला होता है और उससे जापान की सुरक्षा को खतरा है, तो जापान उसकी मदद कर सकता है. इसे ‘सामूहिक आत्मरक्षा’ कहा जाता है.
चुनावी माहौल भी अहम
ताकाइची ने अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री पद संभाला था और तब से उनकी लोकप्रियता अच्छी बताई जा रही है. उन्होंने 8 फरवरी को अचानक चुनाव कराने का ऐलान किया है. माना जा रहा है कि वह अपनी लोकप्रिय छवि और मजबूत रुख का फायदा उठाना चाहती हैं.







