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जशपुर की करमा नृत्य टीम ने जिले का मान राष्ट्रीय स्तर पर किया ऊँचा

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर किया सम्मानित
करमा दल ने 20 नवंबर को अंबिकापुर में हुए जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में जिले का नाम किया रौशन
जशपुर की कला और संस्कृति को लगातार मिल रही उत्कृष्ट पहचान

  जशपुर जिले की पारंपरिक कला और संस्कृति ने एक बार फिर पूरे राष्ट्र में अपना परचम फहराया है। टाटीडांड की जय माता दी करमा नृत्य पार्टी ने राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम गौरवान्वित किया। टीम ने न केवल उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक कला महोत्सव (करम महोत्सव) में प्रथम स्थान प्राप्त कर 2 लाख रुपए जीता, बल्कि शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव नृत्य प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान हासिल कर 50 हजार रुपए का पुरस्कार भी प्राप्त किया। इस प्रकार कुल 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि जीतकर जशपुर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। 20 नवम्बर को अंबिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मंच पर आमंत्रित कर जशपुर की विजेता टीम को स्मृति चिन्ह और चेक राशि भेंटकर सम्मानित किया। इस दौरान मंच में मौजूद राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सहित मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी ताली बजाकर टीम के सदस्यों की उपल्ब्धि पर खुशी जताई। जशपुर की इस शानदार उपलब्धि ने जिला ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के जनजाति संस्कृति को गौरवान्वित किया।
नर्तक दल के 40 सदस्यों ने दी करमा नृत्य की मनमोहक प्रतुति –
जनजातीय नर्तक दलों को प्रदर्शन हेतु उचित मंच प्रदान करने, पारंपरिक नृत्य शैली के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से दोनों नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन 19 नवम्बर 2025 को अंबिकापुर के पीजी कॉलेज ग्राउंड में किया गया था। इसमें सरगुजा संभाग के 6 जिलों सहित बिलासपुर संभाग के 3 जिले बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ से आए नृत्य दलों के बीच जशपुर की टीम ने पारंपरिक वेशभूषा, मांदर की थाप, लयबद्ध ताल और भावपूर्ण प्रस्तुति से निर्णायक मंडल का दिल जीत लिया। सम्मान समारोह के दौरान 20 नवम्बर को राष्ट्रपति के समक्ष जशपुर की 40 सदस्यीय करमा नृत्य पार्टी द्वारा लोक संस्कृति पर आधारित करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। महिला एवं पुरुष कलाकारों ने मिलकर एकरूप लय में पारंपरिक गीत और मांदर की मधुर धुन पर ऐसा आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों एवं जनसमूह का मन मोह लिया। पारंपरिक परिधान, गीत, नृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति ने जशपुर की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। टीम की इस सफलता से जशपुर की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हुई है तथा जिले के कलाकारों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल टीम के लिए, बल्कि पूरे जशपुर जिले के लिए गर्व का विषय है।

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