
Jharkhand Bridge Construction News: धनबाद समेत राज्य के कई जगहों पर क्षतिग्रस्त पुलों की जांच की जिम्मेवारी एसीबी को मिली थी. एसीबी को अपनी जांच में कोई दोषी नहीं मिला. एसीबी ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दे दी और कहा कि जिन गड़बड़ियों की जांच हुई, उनमें सिर्फ कुछ तथ्यों की भूल थी, कोई दोषी नहीं मिला. लेकिन उन्हीं मामलों में विभागीय जांच में कई गड़बड़ियां मिलीं और अधिकतर मामलों में कार्रवाई भी की गई. ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने हाइकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए स्वीकार किया है कि झारखंड में पुलों के निर्माण में भारी गड़बड़ी हो रही है. विभाग ने मामले की जांच के बाद चार जिलों के नौ पुलों में गड़बड़ी की बात स्वीकारी है. इसमें कहा गया है कि गड़बड़ियों के लिए छह से अधिक अभियंताओं पर कार्रवाई की गई है और दो ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया है. वहीं एक ठेकेदार से दोबारा काम कराया गया है. अन्य मामलों में कार्रवाई की जा रही है.
सचिव ने हाइकोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया
विभाग के सचिव मनोज कुमार ने हाइकोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया है. इस मामले में दो जुलाई को हाइकोर्ट में सुनवाई होनी थी, इसलिए विभाग ने अपना पक्ष रखा. विभिन्न जिलों में करोड़ों की लागत से बने पुलों के ढहने के मामले में पंकज कुमार यादव ने जनहित याचिका कोर्ट में दायर की है. इसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विभाग से पक्ष मांगा था. साथ ही समय पर जवाब नहीं देने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था. अब विभाग ने जुर्माने की राशि और अपना पक्ष कोर्ट को दे दिया है. विभाग ने बताया है कि गुमला जिले में छह पुलों की जांच में बीस इंजीनियरों को दोषी पाया गया था और उन पर भी कार्रवाई हुई, पर बाद में कोर्ट के आदेश पर सभी की सजा समाप्त हो गई. पलामू में कलसी बिल्डकॉन के विरुद्ध 2012 में प्राथमिकी दर्ज की गई. कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया, पर साल 2016 में कोर्ट के आदेश पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश समाप्त हो गया. तीन इंजीनियर पर कार्रवाई हुई थी, बाद में सभी को निर्दोष पाया गया. खूंटी जिले में ठेकेदार से दोबारा पुल बनवाया गया. साल 2026 में ठकेदार को डिबार करते हुए इंजीनियरों के विरुद्ध प्रपत्र क गठित करने का आदेश दिया गया है. इसी प्रकार गुमला में क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण की जांच की गई, संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई है.
इस एक उदाहरण से समझें : एसीबी ने कहा नहीं हुई कोई गड़बड़ी, विभाग ने ठेकेदार को किया ब्लैकलिस्ट
बराकर नदी पर ठकेदार गणेश राम डोकानिया को पुल निर्माण का काम मिला था. वर्ष 2009 में पुल ढहा गया. वर्ष 2010 में इस मामले की जांच एसीबी को दी गई. एसीबी ने 2017 में ही सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी. पर जब विभाग ने हाइकोर्ट में सुनवाई के लिए अपना जवाब तैयार करने के लिए जानकारी जुटाई, तो पता चला कि विभागीय जांच में गड़बड़ी मिली थी. इसके चलते डोकानिया को 10 साल के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया गया.
इन पुलों के निर्माण में हुई गड़बड़ी
| जिला | नदी | लागत |
| धनबाद | बराकर नदी | 35.00 करोड़ |
| खूंटी | ताजना नदी | 2.15 करोड़ |
| पलामू | कोयल नदी | 4.25 करोड़ |
| गुमला | (6 पुल) | 14.50 करोड़ |
| कुल | — | 55.90 करोड़ |
धनबाद जिले में छह अभियंताओं पर कार्रवाई
- सुदामा प्रसाद सिंह (जूनियर इंजीनियर) – निलंबन, 6 वेतनवृद्धि रोकी गई, पदोन्नति पर रोक
- सुशील कुमार जैन (जूनियर इंजीनियर) – निलंबन, 6 वेतनवृद्धि रोकी गई, पदोन्नति पर रोक
- दूधनाथ सिंह (सहायक अभियंता) – निलंबन, 3 वेतनवृद्धि रोकी गई, 5 साल तक पदोन्नति पर रोक
- अनिल कुमार सिंह (सहायक अभियंता) – निलंबन, पदावनति, सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित
- निर्मल कुमार दत्ता (सहायक अभियंता) – निलंबन, 5 वेतनवृद्धि व पदोन्नति पर रोक, गैर-कार्य पदस्थापन
- भोला राम (कार्यपालक अभियंता) – निलंबन, 3 वेतनवृद्धि रोकी गई, 5 साल तक पदोन्नति पर रोक
इन ठेकेदारों पर कार्रवाई
- धनबाद मामले में ठेकेदार एम/एस गणेश राम डोकानिया को ब्लैकलिस्ट किया गया और सिक्योरिटी जब्त की गई.
- पलामू मामले में ठेकेदार एम/एस कालसी बिल्डकॉन को ब्लैकलिस्ट किया गया, हालांकि बाद में अदालत के आदेश पर यह निर्णय वापस लेना पड़ा.









