
Iran War : न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, उस फोन कॉल तक डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सैन्य कार्रवाई के आइडिया को मंजूरी दे चुके थे. लेकिन उन्होंने अभी ये तय नहीं किया था कि अमेरिका कब और किन हालात में सीधे इस ऑपरेशन में शामिल होगा. यानी फैसला आधा हो चुका था, बस सही समय और स्थिति का इंतजार किया जा रहा था.
इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने नई खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि यही सही मौका है बड़ा वार करने का. उनका कहना था कि उस समय अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबी लोग कमजोर स्थिति में थे, इसलिए उन्हें एक साथ निशाना बनाने का अच्छा मौका था.
नेतन्याहू को क्या मिली खुफिया जानकारी?
रॉयटर्स के अनुसार, खुफिया सूचना से पता चला कि अली खामेनेई और उनके वरिष्ठ सहयोगियों की मीटिंग होने वाली थी जिसे टाल दिया गया है. मीटिंग को शनिवार रात से शनिवार सुबह कर दिया गया. नेतन्याहू ने इसे हमले का बहुत अच्छा अवसर बताया. इसके बाद ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया गया. इस हमले के कुछ देर बाद खबर आई कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत हो गई है.
नेतन्याहू के कॉल तक ट्रंप पहले ही सैन्य कार्रवाई के विचार को मंजूरी दे चुके थे, लेकिन उन्होंने ये तय नहीं किया था कि अमेरिका कब और किस हालात में इसमें शामिल होगा.
नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हुआ आर्गुमेंट
कॉल के दौरान नेतन्याहू का ट्रंप से आर्गुमेंट हुआ. इसने ट्रंप के अंतिम फैसले में अहम भूमिका निभाई. खुफिया जानकारी दिखा रही थी कि ईरान की नेतृत्व टीम पर हमला नहीं किया गया तो कुछ घंटे के बाद यह मौका हाथ से निकल जाएगा. नेतन्याहू के जोर ने ट्रंप के फैसले को आकार दिया. इसी के बाद अमेरिका ने ऑपरेशन को हरी झंडी दी. रॉयटर्स समेत कई रिपोर्टों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ज्वाइंट स्ट्राइक शुरू की. इसी दौरान व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई है.







