
श्रमिक कल्याण की मिसाल- कोरबा में ‘शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना’ से मिल रहा पोषण और संबल कोरबा, 30 अपै्रल 2026/श्रम विभाग द्वारा संचालित शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना कोरबा जिले के श्रमिकों के लिए पोषण, सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वसनीय आधार बन चुकी है। इस योजना का उद्देश्य पंजीकृत श्रमिकों को मात्र पांच रुपये में स्वच्छ, संतुलित और गरम भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने कार्यस्थल पर ऊर्जावान, स्वस्थ और सक्षम रह सकें।
योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को प्रतिदिन 200 ग्राम पका हुआ चावल, 50 ग्राम दाल, 50 ग्राम सब्जी और 10 ग्राम अचार प्रदान किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर खिचड़ी का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाता है। यह भोजन न केवल स्वच्छ और ताजा होता है, बल्कि श्रमिकों को दिनभर कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को कम लागत में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हुए कुपोषण से बचाना और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि करना है। नियमित और संतुलित भोजन मिलने से श्रमिकों को कार्य के समय घर लौटने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उनके समय और ऊर्जा की बचत होती है। साथ ही योजना के माध्यम से श्रमिकों को श्रम विभाग में पंजीकरण कराने के लिए भी प्रेरित किया जाता है, ताकि वे बीमा, पेंशन, आवास सहायता जैसी अनेक महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कोरबा जिले में इस योजना के अंतर्गत तीन भोजन केंद्र संचालित हैं। बालको प्रोजेक्ट गेट और बुधवारी बाजार (सब्जी मंडी के पीछे) स्थित भोजन केंद्रों में सुबह और दोपहर दोनों समय भोजन प्रदाय किया जाता है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 400 श्रमिक भोजन ग्रहण करते हैं। कोरबा पावर लिमिटेड, पताढी स्थित भोजन केंद्र में दोपहर में भोजन की व्यवस्था है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 200 श्रमिक भोजन करते हैं।
बालको कंपनी में कार्यरत श्रमिक अजय बताते हैं कि अब उन्हें लंच के समय घर जाने की आवश्यकता नहीं होती। वे वीर नारायण सिंह श्रम सहायता भोजन केंद्र पहुँचकर केवल पाँच रुपये में गरम और स्वादिष्ट भोजन कर लेते हैं, जिससे उनके समय और पैसों दोनों की बचत होती है। अन्य श्रमिकों का भी कहना है कि इस योजना से उन्हें कार्यस्थल के निकट ही घर जैसा भोजन मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस योजना के माध्यम से श्रमिकों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्हें संतुलित भोजन मिल रहा है, थकान कम हो रही है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो रही है। यह योजना श्रमिकों को केवल भोजन ही नहीं देती, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य भी करती है।
श्रम विभाग की यह पहल श्रमिक कल्याण की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो यह संदेश देती है कि एक मजबूत राष्ट्र का आधार उसके श्रमिक ही होते हैं, और उनकी भलाई ही समाज और विकास की वास्तविक नींव है।
योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को प्रतिदिन 200 ग्राम पका हुआ चावल, 50 ग्राम दाल, 50 ग्राम सब्जी और 10 ग्राम अचार प्रदान किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर खिचड़ी का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाता है। यह भोजन न केवल स्वच्छ और ताजा होता है, बल्कि श्रमिकों को दिनभर कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को कम लागत में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हुए कुपोषण से बचाना और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि करना है। नियमित और संतुलित भोजन मिलने से श्रमिकों को कार्य के समय घर लौटने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उनके समय और ऊर्जा की बचत होती है। साथ ही योजना के माध्यम से श्रमिकों को श्रम विभाग में पंजीकरण कराने के लिए भी प्रेरित किया जाता है, ताकि वे बीमा, पेंशन, आवास सहायता जैसी अनेक महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कोरबा जिले में इस योजना के अंतर्गत तीन भोजन केंद्र संचालित हैं। बालको प्रोजेक्ट गेट और बुधवारी बाजार (सब्जी मंडी के पीछे) स्थित भोजन केंद्रों में सुबह और दोपहर दोनों समय भोजन प्रदाय किया जाता है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 400 श्रमिक भोजन ग्रहण करते हैं। कोरबा पावर लिमिटेड, पताढी स्थित भोजन केंद्र में दोपहर में भोजन की व्यवस्था है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 200 श्रमिक भोजन करते हैं।
बालको कंपनी में कार्यरत श्रमिक अजय बताते हैं कि अब उन्हें लंच के समय घर जाने की आवश्यकता नहीं होती। वे वीर नारायण सिंह श्रम सहायता भोजन केंद्र पहुँचकर केवल पाँच रुपये में गरम और स्वादिष्ट भोजन कर लेते हैं, जिससे उनके समय और पैसों दोनों की बचत होती है। अन्य श्रमिकों का भी कहना है कि इस योजना से उन्हें कार्यस्थल के निकट ही घर जैसा भोजन मिल जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस योजना के माध्यम से श्रमिकों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्हें संतुलित भोजन मिल रहा है, थकान कम हो रही है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो रही है। यह योजना श्रमिकों को केवल भोजन ही नहीं देती, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य भी करती है।
श्रम विभाग की यह पहल श्रमिक कल्याण की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो यह संदेश देती है कि एक मजबूत राष्ट्र का आधार उसके श्रमिक ही होते हैं, और उनकी भलाई ही समाज और विकास की वास्तविक नींव है।









