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मगरमच्छ संरक्षण से बदली कोटमीसोनार की तस्वीर

 

पर्यटन और रोजगार को मिला बढ़ावा

रायपुर, 20 मार्च 2026/ मगरमच्छों के संरक्षण और पुनर्वास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तहत वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति हमारी जिम्मेदारी और मगरमच्छ के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ के जांजगीर-चांपा वनमण्डल के अंतर्गत स्थापित मगरमच्छ संरक्षण आरक्षिती केन्द्र, कोटमीसोनार आज वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास और पर्यटन का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। इस केन्द्र का निर्माण मगरमच्छों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से किया गया है।

मगरमच्छ की सभी प्रजातियाँ लुप्तप्राय नहीं हैं, लेकिन कुछ प्रजातियों की आबादी बहुत कम हो जाने के कारण, उनके प्रबंधन और सुरक्षात्मक कानूनों की आवश्यकता है। मगरमच्छ संरक्षण परियोजना भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना, कैप्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से मगरमच्छों की संख्या को बढ़ावा देना और प्राकृतिक वातावरण में नवजात शिशु के जीवित रहने की कम दर का समाधान करना है।

वन विभाग द्वारा मगरमच्छ संरक्षण के लिए जांजगीर-चांपा जिला के ग्राम कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब को चिन्हित कर जिले के विभिन्न तालाबों से मगरमच्छों को यहां लाकर सुरक्षित वातावरण में छोड़ा गया। वर्तमान में यहां लगभग 250 मगरमच्छ संरक्षित हैं। इस परियोजना की शुरुआत 9 मई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा शिलान्यास के साथ हुई, जबकि 23 अगस्त 2008 को तत्कालीन वन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा इसका लोकार्पण किया गया। करीब 57.037 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केन्द्र में 34 हेक्टेयर कोर जोन और 23.037 हेक्टेयर बफर जोन निर्धारित किया गया है। वन विभाग ने इसे पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया है, जहां पर्यटकों के लिए पैगोडा, वॉच टावर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, चिल्ड्रन पार्क, ऊर्जा पार्क और 3-डी मिनी थिएटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

उल्लेखनीय है कि 1 नवम्बर 2015 से यहां पर्यटन शुल्क लागू किया गया है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण कोटमीसोनार गांव अब एक छोटे बाजार के रूप में विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को नियमित रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। मगरमच्छ संरक्षण आरक्षिती केन्द्र, कोटमीसोनार न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है। कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब मगरमच्छ संरक्षण-पर्यटन केन्द्र तक पहुंच भी सुगम है। यह जांजगीर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर तथा बिलासपुर से जयरामनगर होते हुए करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला (30 किमी), कोटमीसोनार (1 किमी), अकलतरा (9 किमी) और बिलासपुर (30 किमी) हैं।

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