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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है 18 या 19 जनवरी? ज्योतिषाचार्य से जानें सही तिथि, श्राद्ध नियम और महत्व

माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहते है. मौनी अमावस्या 18 जनवरी दिन रविवार को हैं. यह दिन स्नान, दान और पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण को समर्पित होता है. शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है. हिंदी मास के हर महीने में अमावस्या तिथि आती है, लेकिन माघ मास की अमावस्या तिथि का धार्मिक महत्व बहुत ही अधिक होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किए गए तर्पण और दान से पितरों को शांति मिलती है और व्यक्ति के जीवन से कई प्रकार के कष्ट दूर होते हैं. आइए जानते हैं पिछले एक दशक से भी अधिक समय से कार्यरत ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: से तिथि और श्राद्ध तर्पण की सटीक जानकारी…

Mauni Amavasya 2026 Date: मौनी अमावस्या कब है?

  • माघ मास की अमावस्या 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को है.
  • अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 17 जनवरी 2026 की रात 11 बजकर 53 मिनट पर
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 18 जनवरी 2026 की रात 01 बजकर 08 मिनट पर
  • उदया तिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी.
  • मौनी अमावस्या का दिन गंगा स्नान-दान और श्राद्ध के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है.
  • मौनी अमावस्या पर चंद्रमा धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे.
  • मौनी अमावस्या पर पंचग्रही योग का दुर्लभ संयोग बन रहा हैं.

Mauni Amavasya ka Mahatva: मौनी अमावस्या का महत्व

मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने की परंपरा है. इस दिन मौन रहकर पितरों का तर्पण, ध्यान, मंत्र जाप और भगवान की आराधना करना विशेष फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौन रहने से आत्मा की शुद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. हिंदू धर्म में मौन को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना माना गया है.

Mauni Amavasya Vidhi: मौनी अमावस्या के दिन क्या करें?

  • पितरों का स्मरण कर उनका तर्पण करें.
  • मौनी अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को दान दें.
  • अनाज, वस्त्र, तिल का तेल, फल आदि का दान करें.
  • मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.

Mouni Amavasya Pitru Tarpan: मौनी अमावस्या के दिन तर्पण विधि

  • मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ हल्के रंग के वस्त्र पहनें.
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख कर बैठ जाए और पितरों का स्मरण करें.
  • इस दिन पितरों की शांति के लिए मौन व्रत रखकर श्रद्धा पूर्वक तर्पण करें.
  • तांबे या पीतल के पात्र में जल लें और उसमें, काले तिल, अक्षत, कुशा, गंगाजल मिला लें.
  • दोनों हाथों में जल लेकर अंगूठे के पास से जल भूमि पर छोड़ते हुए अपने पितरों का नाम लें.
  • यदि नाम ज्ञात न हो तो कहें – “मेरे समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों को यह तर्पण समर्पित है.”
  • तीन बार जल अर्पित करें और प्रत्येक पितर के लिए तीन बार जल अर्पित करें.
  • तर्पण के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र, तिल, अन्न या दक्षिणा का दान करें.
  • मौनी अमावस्या के दिन तर्पण करते समय मौन रहना श्रेष्ठ माना जाता है.
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