
पुराने दिन लौटे स्मृति के
क्यांेकि सास भी कभी बहु थी का एक और सीज़न चालू होने वाला है। इसकी उस समय की सबसे चर्चित कलाकार स्मृति ईरानी ने अपनी काबिलियम से राजनीति में प्रवेश ही नहीं लिया बल्कि भाजपा में मंत्री पद तक पहुंच गयीें।
कदाचित् अब उनके पास कुछ ज्यादा काम नहीं है और स्मृति की स्मृति से सास भी कभी बहु थी विलुप्त नहीं हुआ है, तो वे वापस बीते हुए दिनों की ओर लौट रही हैं यानि पुनः इस सीरियल के नये सीजन में काम कर रही हैं।
यहां सिस्टम सुधारने की छूट नहीं
कवर्धा जिला पंचायत के कर्मियों को बार-बार बोलने के बाद भी समय पर न आने के लिये कलेक्टर ने कान पकड़वाए। नतीजा ये निकला कि कलेक्टर को खेद व्यक्त करना पड़ गया। यही बात है जिससे देश की तरक्की में बाधा रही है।
सुधार लाने वाले को बांध कर रखा जाता हैै। हाथ बंधे होने के कारण कोई अधिकारी कार्यवाही नहीं कर पाता तो सुधार होगा कैसे ? सड़े सिस्टम को कार्यवाही का डर ही नहीं रहा।
कर्मचारी संघ ने इस घटना को सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन बताया है। अब पूछिये इन बाबुओं से ये खुद कितना सिविल सेवा आचरण का पालन करते हैं ? सिविल सेवा आचरण उन पर भी तो लागू होता है। और फिर ठीक है यदि कलेक्टर ने कान पकड़वाकर गलती की तो देर से आने के लिये नियम से कौन सी सजा मिलनी चाहिये, वो दी जाए…. पर इतनी हिम्मत सरकार में कहां ?
दूसरी ओर कांकेर के एक इलाके मे तेज हवाओं ने पांच पोल डैमेज कर दिये और लगभग 40 गांवों की बिजली कट गयी। विभागीय कर्मी जब सुधारने निकले तो रस्ते में खंडी नदी उफान पर थी। कर्मियों ने सीढ़ी पकड़कर बहती नदी को पार किया। जान पर खेल गये मगर फर्ज से मुंह नहीं मोड़ा। शाबाश बिजली कर्मी।
शांति के लिये नोबल पुरूस्कार
अटैक के लिये हवाई पट्टी क्या मज़ाक है….
विश्व के चौधरी महानुभाव अमेरिका को इस बार महा अनुभव हुआ, महा कड़वा अनुभव। विश्व में पत्ता भी हिले तो उनकी मंजूरी से। या कम से कम उनकी जानकारी में। ऐसे में यदि दो देशों का झगड़ा हो जाए और अमेरिका अपनी चैधराहट नहीं दिखाए ऐसा भला कैसे हो सकता है।
अमेरिका ने श्रेय लेना चाहा भारत-पाक में सीज फायर का। जिसे हम लोगों ने सिरे से नकार दिया। साथ ही कुछ और घटनाएं हुईं जिससे इस चैधरी को कड़वा अनुभव हुआ। साख बचाने इसने अपने लगभग गुलाम पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर से अपने आपको नोबल पुरूस्कार दिलवाने की बात कहलवाई।
और पाकिस्तान से ईरान पर हमला करने के लिये हवाई पट्टी उपलब्ध करवा ली।
विश्व में शांति के लिये नोबेल पुरूस्कार और अटैक के लिये हवाई पट्टी…. इसे कहते हैं चौधराहट। हालांकि इससे पाकिस्तानी सुलग रहे हैं और पता नहीं कब जनता विस्फोट कर दें।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक मोबा. 9522170700 ‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








