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बैगा अंचल की संस्कृति से प्रभावित हुई नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर टीम, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन को बताया अद्भुत

अंतर्राष्ट्रीय यात्रा लेखिका और फोटोग्राफर ने जनजातीय परंपराओं, लोक संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन की सराहना की, वैश्विक मंच पर मिल सकती है नई पहचान

 

रायपुर, 4 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण जीवनशैली अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन जगत का ध्यान आकर्षित कर रही है। विश्वप्रसिद्ध यात्रा और संस्कृति आधारित नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की टीम ने जिले के बैगा बाहुल्य क्षेत्रों का भ्रमण कर यहां की अनूठी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया।

 

नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की राइटर एंजेला लोकाटेली तथा फोटोग्राफर हाजरा अहमद अंसारी ने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लमना स्थित विलेज वे-स्टे में प्रवास के दौरान ग्रामीण परिवेश को नजदीक से देखा और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित किया। उनका यह दौरा जिले की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

बैगा संस्कृति और परंपराओं ने जीता विदेशी मेहमानों का दिल

 

अपने भ्रमण के दौरान नेशनल जियोग्राफी टीम ने ग्राम लमना, बस्तीबगरा और आमगांव का दौरा किया। यहां उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जाना। बैगा समुदाय की प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली, लोक ज्ञान, पारंपरिक कृषि पद्धतियां और सांस्कृतिक विरासत ने टीम को विशेष रूप से प्रभावित किया। ग्रामीणों के दैनिक जीवन, पारंपरिक आवास, खान-पान और सामाजिक गतिविधियों का अवलोकन करते हुए उन्होंने इस क्षेत्र को भारत की जीवंत सांस्कृतिक धरोहरों में से एक बताया।

 

देशी आमों के स्वाद और ग्रामीण आतिथ्य से हुए प्रभावित

 

नेशनल जियोग्राफी टीम ने जिले में पाए जाने वाले देशी प्रजाति के आमों का स्वाद भी लिया और उनकी विशिष्टताओं की जानकारी प्राप्त की। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अपनाई गई पारंपरिक कृषि पद्धतियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयासों ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीण परिवेश में मिलने वाले आत्मीय आतिथ्य और स्थानीय समुदाय की सादगी ने इस यात्रा को और अधिक यादगार बना दिया।

 

गौरा-गौरी नृत्य ने दिखाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा

 

भ्रमण के दौरान नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की टीम ने जिले के कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्हें जिले की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रसिद्ध गौरा-गौरी नृत्य का प्रदर्शन भी देखने का अवसर मिला। लोकनृत्य की जीवंत प्रस्तुति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों की मधुर ध्वनि ने अतिथियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति से रूबरू कराया। टीम ने इस सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण भारत की जीवंत सांस्कृतिक पहचान बताया।

 

 

 

ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को मिला वैश्विक मंच

 

विलेज वे-स्टे की ओर से श्रीमती मनीषा पांडे और श्री संजय पयासी ने अतिथियों का स्वागत किया तथा उन्हें ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की विस्तृत जानकारी दी। नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर जैसी प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था की टीम का यह दौरा जिले के ग्रामीण पर्यटन को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक प्रचार मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

 

जनजातीय विरासत और ग्रामीण पर्यटन का नया केंद्र बन रहा जीपीएम

 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, जैव विविधता और पारंपरिक ग्रामीण जीवन के कारण तेजी से एक विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। बैगा समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय लोककलाएं, प्राकृतिक परिवेश और सामुदायिक पर्यटन मॉडल इस क्षेत्र को देश के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान प्रदान करते हैं।

 

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्र अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इससे न केवल सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई गति प्राप्त होगी।

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