
नई दिल्ली । अंतर्राष्ट्रीय एस्परगर दिवस पर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) ने एस्परगर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के लिए जागरूकता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए अपने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय केंद्रों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।
इस पहल का उद्देश्य एस्परगर सिंड्रोम से प्रभावित व्यक्तियों के लिए बेहतर समझ और समर्थन को बढ़ावा देना है। राष्ट्रिय गतिशिल दिव्यांगजन संसथान (एनआईएलडी), कोलकाता ने “एस्परगर सिंड्रोम को समझना: अंतर्दृष्टि, चुनौतियाँ और सहायता रणनीतियाँ” विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया। विशेषज्ञों ने एस्परगर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के बारे में अपने दृष्टिकोण साझा किए।
इसके अतिरिक्त, समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी), जम्मू ने जम्मू कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में छात्रों और संकाय सदस्यों को एस्परगर सिंड्रोम के लक्षणों और समावेशिता के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
सीआरसी, नागपुर ने ‘एस्परगर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों को समझना और उनका समर्थन करना’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें मुंबई की प्रारंभिक हस्तक्षेप विशेषज्ञ डॉ. श्रुति ढेंगरे गायकवाड़ शामिल हैं। उन्होंने एस्परगर सिंड्रोम, पुनर्वास तकनीकों और व्यावसायिक चिकित्सा की भूमिका पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।
सीआरसी, गुवाहाटी ने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें एस्परगर सिंड्रोम पर एक वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग शामिल थी, जिसमें प्रतिभागियों को इस स्थिति की विजुअल और शैक्षिक समझ प्रदान की गई। इसके साथ सीआरसी, जयपुर ने एक वर्चुअल वेबिनार आयोजित किया जिसमें एस्परगर सिंड्रोम से संबंधित चुनौतियों और प्रभावी सहायता रणनीतियों पर चर्चा की गई।
इन पहलों के माध्यम से एनआईईपीआईडी ने भारत भर में एस्परगर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के लिए जागरूकता फैलाने और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। विशेषज्ञों के नेतृत्व में की गई चर्चाएं और शैक्षिक प्रयास इस स्थिति से प्रभावित लोगों के लिए समाज में अधिक सहायक और समझ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।







