सिहावा नगरी में विकास की नई धारा

 

महानदी रिवर फ्रंट को मिलेगा भव्य एवं आधुनिक स्वरूप

सिहावा नगरी में महानदी रिवर फ्रंट के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल हुई है।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने 20 करोड़ रुपये की सीएसआर स्वीकृति प्रदान की है।यह परियोजना क्षेत्र के लिए विकास का नया अध्याय सिद्ध होगी।धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को इससे नई गति मिलेगी।यह महत्वाकांक्षी परियोजना एसईसीएल मुख्यालय की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।
इसका उद्देश्य महानदी तट के समग्र विकास के साथ स्थानीय पहचान को सशक्त बनाना है।
परियोजना से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

तीन जोन में होगा विकास
महानदी रिवर फ्रंट को तीन प्रमुख जोन में विकसित किया जाएगा।हर जोन की अपनी विशिष्ट पहचान और उपयोगिता होगी।यह योजना सुव्यवस्थित और दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
पॉइंट–A : कर्णेश्वर महादेव परिसर
कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर को भव्य और व्यवस्थित रूप दिया जाएगा।पत्थर से निर्मित आकर्षक प्रवेश द्वार बनाया जाएगा।धार्मिक आयोजनों के लिए पृथक मेला ग्राउंड विकसित होगा।परिसर की सुरक्षा के लिए कंपाउंड वॉल का निर्माण किया जाएगा।रात्रिकालीन सौंदर्य के लिए हाई मास्ट लाइटिंग की व्यवस्था होगी।एप्रोच रोड पर एवेन्यू प्लांटेशन किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अजीविका भवन का निर्माण होगा।यह भवन स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगा।पर्यटक सूचना एवं स्वास्थ्य केंद्र की भी स्थापना की जाएगी।इससे आगंतुकों को एक ही स्थान पर आवश्यक सेवाएं मिलेंगी।
पॉइंट–B : गणेश घाट एवं रिवर फ्रंट
गणेश घाट को सुरक्षित और आकर्षक रूप में विकसित किया जाएगा।पत्थर से निर्मित सीढ़ीनुमा घाट बनाया जाएगा।लगभग 1200 रनिंग मीटर लंबा पाथवे विकसित होगा।घाट के पास शौचालय और चेंजिंग रूम की सुविधा होगी।
मेडिकल सुविधा और कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा।स्थानीय आजीविका के लिए वेंडिंग शॉप्स विकसित होंगी।यह विकास धार्मिक अनुष्ठानों को सुगम बनाएगा।
पर्यटन गतिविधियों को भी नया आयाम देगा।

पॉइंट–C : श्रृंगी ऋषि सांस्कृतिक विरासत स्थल

श्रृंगी ऋषि स्थल को हिलटॉप रिट्रीट के रूप में विकसित किया जाएगा।यहां ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण होगा।
ट्रैकिंग और प्रकृति दर्शन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
यह स्थल शांति और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा।

बेहतर कनेक्टिविटी
परियोजना क्षेत्र को स्टेट हाईवे–6 से जोड़ा गया है।
अन्य संपर्क मार्ग भी विकसित किए गए हैं।
इससे आवागमन आसान होगा।पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।महानदी रिवर फ्रंट विकास परियोजना सिहावा नगरी को नई पहचान देगी।स्थानीय पर्यटन को मजबूती मिलेगी।रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को स्थायी आधार प्राप्त होगा।

नेतृत्व की सराहना और आगे की राह
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा, “सुशासन के संकल्प के साथ हम अपनी प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करते हुए जीवन को संवार रहे हैं। एमएए अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश कर रहा है।”
पहले अतिक्रमण, गाद, बिना उपचारित नालों का पानी और कचरे ने महानदी की धारा को जकड़ लिया था, वहीं जंगली झाड़ियों ने उसके प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया था। यह स्थिति तब बदली, जब जिला प्रशासन ने महानदी को उसके उद्गम स्थल से पुनर्जीवित करने का अभूतपूर्व प्रयास शुरू किया। धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा द्वारा प्रारंभ महानदी अवेकनिंग अभियान (MAA) न केवल नदी को संवार रहा है, बल्कि लोगों के नदी से रिश्ते को भी नई दिशा दे रहा है। धमतरी के लोगों के लिए यह अभियान केवल नदी पुनर्जीवन तक सीमित नहीं है;
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सिहावा की पहाड़ियों की तलहटी से एक छोटी-सी धारा के रूप में महानदी अपनी यात्रा शुरू करती है। सदियों से यह नदी क्षेत्र की जीवनरेखा रही है—खेतों को सींचती और समुदायों का पोषण करती आई है। लेकिन समय के साथ उपेक्षा ने इसे कमजोर कर दिया। अतिक्रमण, गाद, बिना उपचारित जल-निकास और कचरे ने धारा को अवरुद्ध कर दिया, जबकि झाड़ियों ने प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया। नदी पर निर्भर ग्रामीण इसकी बिगड़ती हालत को बेबस होकर देखते रहे।
यह स्थिति तब बदली, जब जिला प्रशासन ने महानदी को उसके उद्गम से पुनर्जीवित करने का मिशन शुरू किया। महानदी अवेकनिंग अभियान (MAA), जिसे धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने आरंभ किया, नदी के साथ-साथ लोगों के जुड़ाव को भी पुनर्स्थापित कर रहा है।
कलेक्टर मिश्रा बताते हैं, “जल शक्ति अभियान और राज्य के ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान की भावना को समाहित करते हुए हमने मिशन मोड में नदी पुनर्जीवन का संकल्प लिया। उद्देश्य केवल उद्गम स्थल ही नहीं, बल्कि नीचे की ओर 12 किलोमीटर तक महानदी को पुनर्स्थापित करना था।”

चरणबद्ध कार्य और त्वरित परिणाम
पहला चरण 2 मई से शुरू हुआ, जिसमें आठ ग्राम पंचायतों में सबसे गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। कर्नाटक स्थित मेगा फाउंडेशन के सहयोग से तकनीकी सर्वे और परियोजना योजनाएं तैयार की गईं। मात्र 55 दिनों में नालों की गहराई बढ़ाई गई, तटबंध मजबूत किए गए, झाड़ियां हटाई गईं और कचरा साफ किया गया।
कलेक्टर के अनुसार, “वर्षों से नदी गंभीर संकट में थी। अब उसका प्रवाह फिर से सक्रिय और सुव्यवस्थित हो गया है।”
अभियान की परिकल्पना के साथ ही जनभागीदारी को इसका केंद्रीय स्तंभ बनाया गया। ग्रामीणों ने सरकारी अमले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान किया। सिहावा की सरपंच श्रीमती उषा किरण नाग कहती हैं, “इस पहल ने हम सबमें जिम्मेदारी की भावना जगाई है। अब हम अपने प्राकृतिक परिवेश से अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं। इसके लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेंगे।”
पर्यावरणीय संतुलन और सततता को प्राथमिकता दी गई। 4,000 से अधिक नारियल के पौधे लगाए गए और चार स्थलों पर चेक डैम के लिए पहचान की गई—ताकि जल प्रवाह नियंत्रित हो, मृदा संरक्षण हो और भूजल रिचार्ज बढ़े। किसानों को बेहतर सिंचाई सहायता मिली है और भूमि कटाव रोकने के उपाय लागू किए गए हैं।
यह अभियान ‘मोर गांव, मोर पानी’ के साथ एकीकृत है, जिससे जल संरक्षण को सतत कृषि से जोड़ा गया है। देवपुर के सरपंच श्री आत्माराम नेताम कहते हैं, “यह अभियान भूजल रिचार्ज, फसल विविधीकरण और मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।”

चरण-1 की सफलता से उत्साहित होकर प्रशासन ने चरण-2 भी शुरू कर दिया है। इसमें पर्यटन और सततता को बढ़ावा देने की योजना है—इको-टूरिज्म सर्किट, बेहतर अवसंरचना और मानसून के दौरान व्यापक पौधरोपण शामिल हैं। नदी तटों पर किसानों को सतत कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे नए आजीविका अवसर सृजित होंगे। सामुदायिक भागीदारी के साथ वन प्रबंधन को भी सुदृढ़ किया जा रहा है।
एमएए अभियान अब उद्गम-स्तर पर नदी संरक्षण का एक मॉडल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अन्य क्षेत्रों को भी अपनी नदियों के स्रोतों की रक्षा के लिए प्रेरित कर सकता है। धमतरी के लिए यह अभियान आशा, गर्व और उस नदी के साथ नए सिरे से जुड़ाव का प्रतीक है, जिसने सदियों से इसकी संस्कृति को आकार दिया है।
आज जब महानदी पहले से अधिक स्वच्छ और सशक्त होकर बह रही है, तो गांववाले जानते हैं—उनके प्रयास सार्थक सिद्ध हुए हैं।

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