पिछले दिनों रणवीर नाम का एक नीच लड़का पैसेे कमाने के लिये टीवी पर नीचता पूर्ण बात कह गया।
फिर बेशर्मी से हंसते हुए भी उसकी फोटो दिख रही है।
समाज को कुछ ऐसा करना चाहिये कि वो रोता हुआ दिखे। पीड़ा से कराहते हुए दिखे। जान की भीख मांगते हुए दिखे।
कई मामले ऐसे हो जाते हैं जिनमे कानूनी सजा तो काफी कम होती है लेकिन जनता का गुस्सा आरोपी को कानून के दायरे के बाहर ही निपटा देता है।
इस नीच आरोपी के साथ भी यही होना चाहिये।
इसे मुस्लिम देशों मे लागू बर्बर सजा मिलनी चाहिये। पत्थर से मारना चाहिये, चौक पर कोड़े मारने चाहिये।
केवल जेल इसकी सजा नहीं होनी चाहिये। इसने माता-पिता को गाली दी है। इसने हमारे ही नहीं सारी मानवजाति के संस्कारों को तहस-नहस कर दिया।
अगर इसके मां-बाप इस दुनिया में हैं तो शर्म से जान दे दें या खुद ही अपने बेटे को गोली मार कर आत्महत्या कर लें।
इस शख्स पर केस भी तत्काल पूरा कर लेना चाहिये। हर रोज की सुनवाई करके इस का फैसला कर लेना चाहिये। आम तौर हमारे यहां न्याय के लिये बीसियों साल लग जाते हैं।
50-50 सालों से अटके मुकदमें‘
जस्टिस डिलेड इस जस्टिस डिनाईड’
एक जानकारी के मुताबिक देश में ऐसे भी मामले हैं जिनमे सजा 3 से 7 साल तक है लेकिन चल वे पिछले 50 सालों से रहे हैं।
इनकी संख्या लगभग साढ़े 13 सौ है। ऐसे मामलों में केस दायर करने वाले और सामने वाले पक्षकारों की मौत हो चुकी है।
यहां तक कि कई मामलों में गवाहों की भी मौत हो गयी है लेकिन मामले न्यायालयों में जारी हैं।
कहावत है कि ‘जस्टिस डिलेड इस जस्टिस डिनाईड’ न्याय में देरी अन्याय ही तरह है। सच भी है जीते जी न्याय न मिलना अन्याय ही तो है।
कई मुकदमों में तो दूसरी पीढ़ी भी गुजर गयी है। लकिन केस का निर्धारण होते नहीं दिख रहा। इस दिशा में सुधार के लिये काफी मशक्कत जारी है और जल्द ही कुछ न कुछ ठोस उपलब्धि हासिल होगी ऐसी आशा है।
रणवीर इलाहाबादिया को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा मिले पूरा देश ऐसी आशा कर रहा है। वैसे कई हिंदु संगठनों, लोगों ने उसे खुद सजा देने की घोषणा भी की है। अगर ऐसा होता है तो पूरे देश को खुशी ही होगी। —————————————————-
जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक, मोबा. 9522170700‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’———————————————-







