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स्वच्छता पखवाड़ा सह किसान दिवस पर कृषक संगोष्ठी एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन

भारतवर्ष के पांचवे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के जन्म दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 23 दिसम्बर को किसान दिवस मनाया जाता है, इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, भलेसर महासमुंद में किसान संगोष्ठी एवं कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। विदित हो कि 16 से 31 दिसम्बर 2025 तक स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन भी किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में वर्चुअल मोड के माध्यम से केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री   शिवराज सिंह चौहान जी एवं कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी के द्वारा किसानों को संबोधित किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि महात्मा गांधी नरेगा के स्थान पर विकसित भारत जी राम जी का नया बिल पास हुआ है जिसमें हितग्राहियों को 125 दिवस का रोजगार मिलेगा अब भुगतान 7 दिवस के अंदर संभव हो सकेगा। इसके अलावा खेती करने वाले कृषकों को मजदूरों की समस्या रहती थी उसे देखते हुए फसल कटाई के समय विकसित भारत जी राम जी कार्य 2 माह स्थगित रहेगा जिससे कृषि कार्य में मजदूरों की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित किसान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम भलेसर के सरपंच   सेवाराम कुर्रे जी उपस्थित थे। साथ ही ग्राम के वरिष्ठ कृषक एवं पंच प्रतिनिधि   मनोहर जी भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के द्वारा अन्नदाता किसान भाइयों को रबी फसल की उन्नत खेती, उद्यानिकी फसलों की खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, रबी फसलों में उर्वरक एवं शस्य प्रबंधन, फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाले यंत्र एवं सूक्ष्मजीवों की उपयोगिता के बारे में विस्तृत चर्चा की गई।
वैज्ञानिकों द्वारा कृषकों को रबी के मौसम में धान फसल के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं कम जल मांग वाली फसलों को लगाने की सलाह दी गई। साथ ही साथ इन फसलों को लगाने से मृदा एवं पर्यावरण में होने वाले लाभ एवं जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापक्रम के प्रभाव को कम करके भूमिगत जल का किस प्रकार संरक्षण किया जा सकता है इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। उक्त कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ आर.एल. शर्मा, मृदा वैज्ञानिक, डॉ. कुणाल चन्द्राकर, प्रक्षेत्र प्रबंधक, श्री कमल कांत लोधी एवं वरिष्ठ अनुसंधान सहायक   तरूण प्रधान के द्वारा व्याख्या दिया गया एवं कृषकों से विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिले के कृषकों के साथ-साथ कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, महासमुंद एवं फिंगेश्वर के चतुर्थ वर्ष के रावे कार्यक्रम के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया गया।

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