Tuesday, May 21

ओवैसी को हैदराबाद से उखाड़ फेंकना है, काटनी है उनकी पतंग’, AIMIM चीफ पर माधवी लता का बड़ा हमला

Madhavi Latha News: माधवी लता को जब से बीजेपी ने हैदराबाद से अपना प्रत्याशी बनाया है, तब से ही वह अपने बयानों के लिए चर्चा में हैं. वह लगातार ओवैसी पर निशाना भी साध रही हैं.  देश की कुछ ऐसी प्रमुख सीटें हैं, जिन पर हो रहा लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प है. ऐसी ही एक सीट हैदराबाद है, जहां एक तरफ चार बार के सांसद असदुद्दीन ओवैसी हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी की माधवी लता. ऑल इंडिया-मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष ओवैसी के सामने बीजेपी ने सियासत में एंट्री कर रहीं माधवी लता को टिकट देकर सभी को हैरान कर दिया था.

माधवी लता ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि उनका सिर्फ एक ही मकसद है और वो है- असदुद्दीन ओवैसी को यहां से उखाड़ फेंकना और उनकी पतंग को काटना. एआईएमआईएम का चुनाव चिह्न पतंग है. माधवी लता के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें वह काल्पनिक तौर पर पतंग काटते हुए दिखाई दीं. माधवी पूरे जोर-शोर से चुनाव प्रचार कर रही हैं. इस वक्त वह हैदराबाद की गली-गली में जाकर लोगों से वोट मांग रही हैं.

ओवैसी को उखाड़ फेंकना हमारा मकसद: माधवी लता

अमर उजाला को दिए एक इंटरव्यू में माधवी लता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 अप्रैल को होने वाले हैदराबाद दौरे को सवाल किया गया और पूछा गया कि उनकी चुनावी तैयारी कैसी है. इस पर माधवी ने कहा, “मोदी जी हमारे पिता समान हैं. हम लोग उनकी आज्ञा से आगे बढ़ रहे हैं. फिलहाल हमारे दिमाग में बस एक ही मुद्दा है और वह है- असदुद्दीन ओवैसी को यहां से उखाड़ फेंकने का. उनकी पतंग काटने और उसे फाड़ने का.”

हैदराबाद से बीजेपी प्रत्याशी ने कहा, “हमारा मकसद है कि हम औरतों, पसमांदा, दलितों के लिए काम करें. इसके अलावा पीएम मोदी आ रहे हैं तो हमें जो कहना और बोलना होगा, वो हम बोल लेंगे.” माधवी लता चुनाव प्रचार के दौरान लगातार ओवैसी पर हमलाभी बोल रही हैं.

40 साल राज करने वालों ने गरीबों का फायदा उठाया: माधवी लता

चुनावी मुद्दों को लेकर बात करते हुए माधवी लता ने कहा कि हैदराबाद में सामाजिक सेवा करते हुए हमने गरीबी के साथ-साथ और भी बहुत कुछ देखा है. जिन लोगों ने यहां 40 साल राज किया है, उन्होंने गरीबों का गलत फायदा उठाने का काम किया. यहां का सबसे बड़ा मुद्दा लोगों को भड़काना और उन्हें गलत दिशा में ले जाना है. भले ही मजहब की बात की गई है, लेकिन मजहब वालों ने तरक्की का कोई काम नहीं किया. उनसे तो खुद पसमांदा मुस्लिम खुश नहीं हैं.

 

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