
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धान खरीदी के लिए लागू की गई पारदर्शी व्यवस्था और डिजिटल नवाचारों ने किसानों के लिए धान विक्रय की प्रक्रिया को अत्यंत सरल और सुविधाजनक बना दिया है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत भगवानपुर खुर्द के निवासी और प्रगतिशील किसान श्री लालबहादुर सिंह के लिए इस वर्ष की धान खरीदी एक सुखद अनुभव लेकर आई है।
डिजिटल तकनीक से मिली भीड़ से मुक्ति
किसान लालबहादुर सिंह ने बताया कि उनका कुल 73 क्विंटल धान का रकबा है। शासन की आधुनिक व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “पहले टोकन प्राप्त करने के लिए समिति के चक्कर काटने पड़ते थे और कतार में लगकर लंबा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब शासन ने ’किसान तुंहर टोकन’ ऐप के जरिए घर बैठे मोबाइल से ऑनलाइन टोकन काटने की सुविधा प्रदान की है, जिससे समय की बचत हो रही है और भीड़ से भी मुक्ति मिली है।“ उन्होंने बताया कि बिना किसी तकनीकी समस्या के उन्होंने अपने मोबाइल से ही पूरे धान का टोकन स्वयं काट लिया।
उपार्जन केंद्रों पर सुव्यवस्थित इंतजाम
श्री लालबहादुर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि जैसे ही वे नमना कला उपार्जन केंद्र पहुंचे, वहां की व्यवस्थाएं अत्यंत सुव्यवस्थित थीं। केंद्र पर गेट पास से लेकर नमी परीक्षण तक की प्रक्रिया तत्काल पूरी की गई और बिना विलंब के बारदाने उपलब्ध कराए गए। उन्होंने समिति के कर्मचारियों के सहयोगात्मक व्यवहार की प्रशंसा करते हुए कहा कि धान विक्रय के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।
3100 मूल्य और 21 क्विंटल खरीदी से आर्थिक सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि धान का सर्वाधिक मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलना और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी का निर्णय किसानों के हित में है। उन्होंने बताया कि धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे गेहूं, तिलहन और सब्जी की उन्नत खेती के विस्तार में कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार की आमदनी में वृद्धि हुई है।
सशक्त और खुशहाल हो रहा प्रदेश का अन्नदाता
किसान लालबहादुर ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की नीतियों से प्रदेश का किसान अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और खुशहाल हो रहा है। उपार्जन केंद्रों पर पेयजल, छाया और बैठने की समुचित व्यवस्था ने धान बेचने की प्रक्रिया को किसानों के लिए सरल और सम्मानजनक बना दिया है।








