
‘द वेडनेसडे’ यही नाम था उस फिल्म का जिसमें फिल्म के हीरो ने कुछ स्थानों पर बम रख दिये थे और कुछ आतंकियों को छोड़ने की मांग करने लगा। जब पुलिस अधिकारी ने पूछा कि क्या गैरेंटी है कि आतंकियों को छोड़ने के बाद तुम हमें बमों के पते बताओगे ? नहीं बताए तो… ?
इस पर हीरो ने कहा ‘मै क्या आपको पंखा बेच रहा हूं, जो गैरेंटी दूंगा’?
साफ है कि हीरो की बात की कोई गैरंेटी नहीं थी। लेकिन अगर हीरो पंखा बेच रहा होता तो उसकी गैरेंटी दी जा सकती थी।
पहलगाम:
प्रतिक्रिया से पाकिस्तान परेशान
सहमा, दुबका, आशंकित पाकिस्तान अब बस भारत के प्रहार का इंतजार कर रहा है। निस्संदेह वो अपने आकाओं की तरफ उम्मीद से देख रहा होगा। और उसके आकाओं को उसे साफ संदेश है कि ‘भई हिमाकत तो तुमने बड़ी की है। और सामने है भी मोदी।
कोई अटलजी नहीं हैं कि जिन्हे दुहाई देकर, हाथ-पैर जोड़कर माफी मांग ली जाए। ये तुम्हें छोड़ेगा नहीं
पाक कहेगा ‘बस इसीलिये तो फटी पड़ी है। कुछ करो’। आई एम साॅरी, आगे से नहीं करूंगा, मेरी जमानत ले लो’।
उसके आका कहंेगे या अब तक कह भी चुके हांेगे कि ‘अबे लतखोर तेरी गैरंेटी लें, तू कोई पंखा है’ ? अबे अगर तू पंखा भी होता न तो पूरे विश्व मे तेरी कोई गैरेंटी लेने वाला नहीं है। अब तो तू जूतियां पड़ने का इंतजार कर….. ।
महामूर्ख है
अनुभवी लोग कहते हैं कि जहां भी रहो पड़ोसी से मिलकर रहो। पड़ोसी से पहले आपके पास कोई नहीं पहुंच सकता। जब भी आपको मदद की जरूरत होगी तो आपके रिश्तेदार, चाहने वाले, अन्य मददगार बाद में पहंुचेंगे। सबसे पहले आपका पड़ोसी पहुंच जाएगा। इसलिये पड़ोसी से हमेशा बना के चलो।
और धूर्त पड़ोसी होने के नुकसान ही नुकसान।
पाकिस्तान मूर्ख ही नहीं महामूर्ख है। इसलिये कि पड़ोसी होने के कई फायदे हैं। अच्छे पड़ोसी होने के और ज्यादा फायदे हैं। जरूरत से ज्यादा उदार पड़ोसी होने के तो फायदे ही फायदे हैं।
और हम जरूरत से ज्यादा उदार हैं।
उंगली का जवाब डण्डा
कुछ ही पहले तक ये स्थिति थी कि पाकिस्तान किसी संकट में आ जाता और भारत से, मोदीजी से गुहार लगाता, ‘राम-राम भैया जी, परेशान हूं। मेरी मदद कीजिये’ तो मोदीजी भी मदद को तैयार हो जाते।
महामूर्ख पाकिस्तान ने अपने पैर पर कुल्हाड़ा मार लिया, अपना सर फोड़ लिया है। इससे पहले हर बार यानि कांग्रेस की सरकार जाने के बाद और भाजपा की सरकार आने के बाद जब भी पाकिस्तान ने उंगली की है, तब उसकी उंगली ही नहीं तोड़ी पूरे हाथ पर करारी चोट की है जिसका घाव अभी तक भरा नहीं है।
तुमने उंगली की, हम डण्डा करेंगे।
वास्तव में पहलमाम में आतंकी हमला पाकिस्तान की बहुत बड़ी हिमाकत और बेवकूफी की इंतिहां है।
लो बता दिया मोदी को
जहां पहलगाम में आतंकियों ने निर्दोष मासूम लोगांे को मारा। वहां एक महिला ने अपने पति के मारे जाने पर खुद को भी मारने को कहा तो एक ने जवाब दिया कि जाओ… और मोदी को बता देना।
तो लो बता दिया मोदी को… अब निश्चित रूप से कह रहे होंगे ‘हाय, क्यों बता दिया मोदी को…’। अभी तो ये शुरूआत है, अभी तो पहला ही कदम उठाया है भारत ने। आगे, आगे देखिये होता है क्या….

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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