
जगदलपुर, 16 मार्च 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित पशु सखियाँ अब धरातल पर बदलाव की नई पटकथा लिख रही हैं। ये महिलाएं न केवल एक प्रशिक्षित सामुदायिक कैडर के रूप में उभरी हैं, बल्कि पशुपालन को आधुनिक और लाभप्रद बनाने के लिए गाँव-गाँव जाकर तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रही हैं। हाल ही में कृषि विज्ञान केंद्र और पशुपालन विभाग के समन्वय से आयोजित 17 दिवसीय विशेष हेल्प प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन सखियों ने वर्तमान में जगदलपुर और बस्तर ब्लॉक के विभिन्न क्षेत्रों में सघन टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रबंधन अभियान की शुरुआत की है।
क्षेत्रीय गतिविधियों की कड़ी में जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम माड़पाल में एक सराहनीय उदाहरण देखने को मिला, जहाँ पशु सखी ने जानकी दीदी के घर पहुँचकर लगभग 250 बत्तखों को कृमि नाशक दवा पिलाई। इसी निरंतरता को आगे बढ़ाते हुए ग्राम पंचायत कलचा में मुर्गियों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया, ताकि समय रहते उन्हें घातक संक्रमणों से बचाया जा सके। बस्तर ब्लॉक के ग्राम तुरपुरा में भी पशु सखियों द्वारा पशुधन प्रबंधन और टीकाकरण के कार्यों को तत्परता से संपन्न किया जा रहा है।
पशु सखियों का यह कार्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पशुपालकों को जागरूक करने के लिए पशु पाठशाला जैसी अभिनव पहल भी कर रही हैं। इन पाठशालाओं के माध्यम से वे ग्रामीणों को संतुलित आहार, कम लागत में प्रोटीनयुक्त अजोला उत्पादन और स्थानीय सामग्री से दाने का मिश्रण तैयार करने की विधियाँ सिखा रही हैं। साथ ही पशुओं के रहने के स्थान को स्वच्छ और हवादार बनाने के तरीकों पर भी जोर दिया जा रहा है। साथ ही रिकॉर्ड प्रबंधन, पशु बीमा और बेहतर नस्ल के चुनाव जैसे विषयों पर दी जा रही सलाह से पशुपालकों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि हो रही है।
पशु चिकित्सा विभाग के साथ तालमेल बिठाकर किया जा रहा पशु सखियों का यह कार्य पशुओं की मृत्यु दर में भारी कमी ला रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान महिलाओं को गाँव में एक विशेषज्ञ के रूप में पहचान दिला रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर सशक्त हो रही हैं। वर्तमान में बस्तर के ग्रामीण अंचलों में यह कैडर पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर रहा है।









