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नैनो डीएपी और नैनो यूरिया से बढ़ा उत्पादन दुखा राम बने प्रगतिशील किसान

रायपुर, 9 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि आदानों के उपयोग से जिले के किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। कोण्डागांव जिले के बड़ेराजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पिटेचुवा के प्रगतिशील किसान श्री दुखा राम मरकाम इसका एक उदाहरण हैं। दुखा राम के पास 15 एकड़ पर कई वर्षों से खेती-किसानी करते हुए आ रहे हैं और पिछले दो वर्षों से अपने खेतों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें फसल उत्पादन में उल्लेखनीय लाभ प्राप्त हुआ है।

 

किसान श्री मरकाम ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के छिड़काव से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उनके अनुभव के अनुसार पारंपरिक दानेदार उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल को आवश्यक पोषण प्रभावी रूप से प्राप्त होता है।

 

उन्होंने बताया कि धान की रोपाई के लगभग 30 दिन बाद नैनो उर्वरकों का पहला छिड़काव किया जाता है। आवश्यकता अनुसार 50 से 60 दिनों के बीच दूसरा छिड़काव किया जा सकता है। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है तथा पौधे अधिक स्वस्थ और मजबूत बनते हैं। श्री मरकाम ने बताया कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से वे प्रति एकड़ लगभग 15 से 20 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उर्वरक उपयोग की दक्षता बढ़ी है, जिससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली है।

 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार किसान श्री मरकाम पूर्व में प्रति एकड़ लगभग 50 किलोग्राम दानेदार डीएपी का उपयोग करते थे, जिस पर लगभग 1850 रुपये का खर्च आता था और औसत उत्पादन 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होता था। वहीं नैनो डीएपी के उपयोग के बाद दानेदार डीएपी की आवश्यकता में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। वर्तमान में प्रति एकड़ दो बोतल नैनो डीएपी का उपयोग किया जा रहा है, जिस पर लगभग 1200 रुपये का खर्च आता है। इसके साथ ही उत्पादन बढ़कर 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। फसल में हरियाली, शाखाओं की संख्या, जड़ों के विकास तथा बालियों की वृद्धि में भी सकारात्मक सुधार देखा गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि तथा उर्वरक लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

 

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के सकारात्मक परिणामों से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी इनके उपयोग के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। इससे कृषि में आधुनिक एवं टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है, जो भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

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