Ro no D15139/23

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया से बढ़ा उत्पादन दुखा राम बने प्रगतिशील किसान

रायपुर, 9 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि आदानों के उपयोग से जिले के किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। कोण्डागांव जिले के बड़ेराजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पिटेचुवा के प्रगतिशील किसान श्री दुखा राम मरकाम इसका एक उदाहरण हैं। दुखा राम के पास 15 एकड़ पर कई वर्षों से खेती-किसानी करते हुए आ रहे हैं और पिछले दो वर्षों से अपने खेतों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें फसल उत्पादन में उल्लेखनीय लाभ प्राप्त हुआ है।

 

किसान श्री मरकाम ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के छिड़काव से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उनके अनुभव के अनुसार पारंपरिक दानेदार उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल को आवश्यक पोषण प्रभावी रूप से प्राप्त होता है।

 

उन्होंने बताया कि धान की रोपाई के लगभग 30 दिन बाद नैनो उर्वरकों का पहला छिड़काव किया जाता है। आवश्यकता अनुसार 50 से 60 दिनों के बीच दूसरा छिड़काव किया जा सकता है। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है तथा पौधे अधिक स्वस्थ और मजबूत बनते हैं। श्री मरकाम ने बताया कि नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग से वे प्रति एकड़ लगभग 15 से 20 क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ उर्वरक उपयोग की दक्षता बढ़ी है, जिससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली है।

 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार किसान श्री मरकाम पूर्व में प्रति एकड़ लगभग 50 किलोग्राम दानेदार डीएपी का उपयोग करते थे, जिस पर लगभग 1850 रुपये का खर्च आता था और औसत उत्पादन 10 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होता था। वहीं नैनो डीएपी के उपयोग के बाद दानेदार डीएपी की आवश्यकता में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। वर्तमान में प्रति एकड़ दो बोतल नैनो डीएपी का उपयोग किया जा रहा है, जिस पर लगभग 1200 रुपये का खर्च आता है। इसके साथ ही उत्पादन बढ़कर 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। फसल में हरियाली, शाखाओं की संख्या, जड़ों के विकास तथा बालियों की वृद्धि में भी सकारात्मक सुधार देखा गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि तथा उर्वरक लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।

 

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के सकारात्मक परिणामों से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी इनके उपयोग के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। इससे कृषि में आधुनिक एवं टिकाऊ पद्धतियों को बढ़ावा मिल रहा है, जो भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

  • Related Posts

    गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा रूरल टेक्नोलॉजी विभाग में सुरभि पांडेय को मिला डॉक्टरेट उपाधि

    रायपुर, दिनांक 26 जुलाई 2026/ गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा रूरल टेक्नोलॉजी विभाग में कु. सुरभि पांडेय को डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने अपना शोध कार्य डॉ. भास्कर चौरसिया…

    Read more

     ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर में ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्-2026’ का दूसरा दिन संपन्न

    एकादश रुद्राभिषेक, कूष्माण्डी एवं तिल होमम तथा उमामहेश्वर होमम से गूंजा देवालय   *कवर्धा।* छत्तीसगढ़ के ‘खजुराहो’ के नाम से विख्यात कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन भोरमदेव महादेव मंदिर…

    Read more

    NATIONAL

    VIDEO जंतरमंतर का सच,सनातन को गाली,

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

    आधी रात के वीडियो पर जनता का मिला भरपूर साथ, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- Thank You Friends

    आधी रात के वीडियो पर जनता का मिला भरपूर साथ, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- Thank You Friends

    जंतर मंतर का सच

    जंतर मंतर का सच

    खरगे की पीएम मोदी को दो टूक: कहा, धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त कर संसद आइए, फिर होगी चर्चा

    खरगे की पीएम मोदी को दो टूक: कहा, धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त कर संसद आइए, फिर होगी चर्चा

    सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, कहा- छात्रों के साथ दुश्मनों जैसा हो रहा व्यवहार

    सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, कहा- छात्रों के साथ दुश्मनों जैसा हो रहा व्यवहार