
Rajya Sabha Election: बिहार की राजनीति में एक दशक से भी ज्यादा समय के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दिलचस्प मोड़ आ गया है.बिहार में पूरे 12 साल बाद ऐसी स्थिति बनी है जहां निर्विरोध चुनाव के बजाय वोटिंग की नौबत आती दिख रही है.
16 मार्च को होने वाले इस मतदान ने न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं. पटना के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या इस बार भी 2014 जैसा कोई उलटफेर देखने को मिलेगा या समीकरण कुछ और ही इशारा कर रहे हैं.
इतिहास दोहराने की दहलीज पर बिहार का सियासी समीकरण
बिहार में आखिरी बार साल 2014 में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था, जब जदयू के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशियों ने ताल ठोक दी थी. उस वक्त पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियाबी को कड़ी मशक्कत के बाद जीत हासिल हुई थी. उस चुनाव में पवन वर्मा को 122 वोट मिले थे जबकि अनिल शर्मा को 108 वोट मिले थे.
इसी तरह गुलाम रसूल बलियाबी और साबिर अली के बीच भी मुकाबला हुआ था. हालांकि तीसरी सीट पर शरद यादव निर्विरोध चुन लिए गए थे. अब एक बार फिर बिहार में चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है.
चार सीटों पर जीत लगभग तय, पांचवीं सीट पर सस्पेंस
विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है. लेकिन पांचवीं सीट पर पेच फंसा हुआ है. चार सीटों के बाद एनडीए के पास करीब 38 वोट सरप्लस रहेंगे, जबकि राजद के पास 35 वोट हैं. ऐसे में छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका बेहद अहम हो गई है.
एआईएमआईएम के पांच और बसपा के एक विधायक का वोट इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है. अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो पांचवीं सीट का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है.
कौन-कौन हैं मैदान में उम्मीदवार
इस बार राज्यसभा की पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं. जदयू ने केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से नितिन नवीन और शिवेश राम चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं राजद ने अमरेंद्रधारी सिंह को उम्मीदवार बनाया है. संख्याबल को देखते हुए राजद ने केवल एक ही उम्मीदवार उतारा है.
अनंत सिंह को मतदान की अनुमति
इस चुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प मोड़ भी सामने आया है. बेऊर जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह को पटना की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राज्यसभा चुनाव में मतदान करने की अनुमति दे दी है. दुलारचंद हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में रहने के बावजूद उन्हें 16 मार्च को विधानसभा जाकर वोट डालने की इजाजत मिल गई है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार का यह राज्यसभा चुनाव खास तौर पर पांचवीं सीट को लेकर काफी रोमांचक हो सकता है, जहां अंतिम नतीजा वोटिंग के बाद ही साफ होगा.






