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धौरपुर पूर्व राजपरिवार में मिलीं दुर्लभ धार्मिक पाण्डुलिपियां जिला पंचायत सीईओ तथा ज्ञानभारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान की जिला स्तरीय समिति के नोडल   विनय अग्रवाल ने अवलोकन कर पाण्डुलिपियों को किया अपलोड

अम्बिकापुर 21 मई 2026/  पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान सरगुजा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से धार्मिक पाण्डुलिपियां बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं। ताड़पत्रों पर लिखी रामायण, महाभारत एवं पुराण आधारित पाण्डुलिपियों के साथ-साथ तंत्र-मंत्र और साधना से जुड़ी दुर्लभ सामग्री भी प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में धौरपुर के पूर्व राजपरिवार के यहां से अर्कसेल वंशावली तथा तंत्र-मंत्र संबंधी कुल 11 महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां सामने आयी हैं। विशेष पाण्डुलिपियों की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा ज्ञानभारतम पांडुलिपी सर्वेक्षण अभियान की जिला स्तरीय  समिति के नोडल  श्री विनय अग्रवाल अम्बिकापुर स्थित पाण्डुलिपि संरक्षक श्री मार्तण्ड सिंह देव के निवास पहुंचे। इस दौरान श्री मार्तण्ड सिंह देव के पुत्र श्री आदित्य सिंह देव ने सभी पाण्डुलिपियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कवि स्वर्गीय रामनाथ भट्ट ने महाराजा रघुनाथ शरण सिंह देव की आज्ञा से वर्ष 1959 में कुल 62 पृष्ठों में अर्कसेल वंशावली की रचना की थी। इसके अलावा स्वर्गीय सूर्य प्रताप सिंह देव के आदेश पर राजपुरोहित द्वारा वनदुर्गा महाविद्या (52 पृष्ठ), काली तंत्र (133 पृष्ठ) तथा तत्कालीन महाराजा के निर्देश पर पंडित देवदत्त द्वारा यंत्र-मंत्र वशीकरण मंत्र (48 पृष्ठ) लिखे गये थे। वर्ष 1842 में 33 पृष्ठों में वनदुर्गा महामंत्र लिखे जाने की जानकारी भी सामने आयी है। इनके अतिरिक्त नीलकण्ठ स्तोत्र, अदकाली तंत्र, महामोहन मंत्र, विष्णु सहस्त्रनाम रुद्रशाप विमोचन मंत्र तथा हनुमान स्तोत्र जैसी पाण्डुलिपियां भी उल्लेखनीय हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अग्रवाल ने पाण्डुलिपियों के डिजिटल अपलोड की प्रक्रिया की जानकारी ली तथा स्वयं पाण्डुलिपियों को अपलोड करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है। पांडुलिपियां केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि हमारी ज्ञान परंपरा और इतिहास की अमूल्य धरोहर है, इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जगदलपुर से आए सरगुजा जिले के प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह ने इन पाण्डुलिपियों को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर सीतापुर से आए सर्वेक्षकों को जिला समिति सदस्य श्री श्रीश मिश्र द्वारा मौके पर ही पाण्डुलिपि अपलोड प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान ज्ञानभारतम जिला स्तरीय समिति सदस्य एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल तथा सर्वेक्षक गौरव पाठक भी उपस्थित रहे।

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