
आजकल भक्त और चमचे नामक प्रजाति के बीच नाम और नामकरण को लेकर जुबानी और पुतलाई जंग छिड़ी हुई है । सड़क से स्टेडियम होते हुए शहरों के बाद योजनाओं के नाम रखने और बदलने का खेल बदस्तूर जारी है चाहे सरकार कांग्रेसी हो या भाजपाई कवर्धा से दिल्ली तक जुबानी व पुतलाई जंग चर्चा का विषय है ।
राम नाम की रट लगाए चमचे भक्त पर नाम बदलने का आरोप लगा नेतागिरी को चमकाने में लगे है । नरेगा से महात्मा गांधी नरेगा नाम से बनी योजना जिसका नाम शॉर्टकट के चक्कर महात्मा जी को गायब कर कब मनरेगा कर दिया गया किसी को नही पता किंतु अब मनरेगा से जी राम जी तक का सफर तय कर पाई योजना को लेकर नेतागिरी चालू है । नेतागिरी का चक्कर ऐसा की जी राम जी को लेकर विपक्षी सरकार को घेर रहे है । गांधी वादी नेताओ को गांधी जी का नाम खतरे में दिख रहा है । उन नेताओं के लिए महात्मा गांधी जीवन बीमा पॉलिसी की तरह है । गांधी जी का जितना फायदा कांग्रेस ने नही उठाया उससे ज्यादा मोदी ने उठाया फिर भी भक्त कह रहे अरे मियाँ एक योजना का नाम ही तो राम जी के नाम पर रख लिया है वो भी तो गांधी के ही राम थे । जिन्होंने महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को शार्टकट के चक्कर में मनरेगा बना डाला तो हमने तो उनके आराध्य के नाम पर जी राम जी कर दिया तो कौन सा बड़ा गुनाह कर दिया हमने राम नाम ही तो रखा है कौन सा देश लूटा लिया जो इतनी हाए तौबा मचा रखी है आखिर नाम मे रक्खा क्या है ?
नाम को लेकर मियाँ शेक्सपियर चच्चा जान भी ” नाम मे क्या रक्खा है ” फ़रमाते हुए कहते है गुलाब को कुछ भी बोलो महक तो वही रहने वाली है । शेक्सपियर चच्चा आज कवर्धा से दिल्ली तक दौड़ लगा आते तो उनकी सोच बदल जाती । उन्हें पता भी चल जाता कि नाम मे ही सब कुछ रखा है । नाम भले ही शब्दों का खेल , हेरफेर , मायाजाल है । शब्द में थोड़ी सी हेरफेर करके देखो दिन में तारे नज़र न आ जाये तो कहना । मेरी बात पे विश्वास ना हो तो किसी दिन अपनी बेगम को आज तो तुम बहुत कातिल लग रही हो कहने की बजाय हत्यारिन लग रही हो कह कर देखो दिन में तारे नजर आने के साथ साथ सारे ज्ञान चक्षु क्षणभर में खुल जाएंगे ।
बहरहाल कटते जंगल ढहते पहाड़ , अडानिस्तान बनते प्रदेश के आरोपो की खबरों के बीच जल जंगल जमीन बचाने सत्ता और जनता के बढ़ते संघर्ष की किसी कोने में छपती खबर या प्राइम टाइम को छोड़ कर चलाई जाती खबरों की सद्गति के बीच महिला पुलिस कर्मी की इज्जत तार तार करने वाली दुखदाई खबर छत्तीसगढ़ पुलिस व सरकार पर बदनुमा दाग है जो कब धुलेगा नही पता किंतु इन सबके बीच नाम नाम के खेल में उलझे नेता गांधी और गाँधी के जी राम जी के बीच उलझे पड़े है । नेताओ की इस कुकुर बिलाई वाली लड़ाई के बीच अफसरो की पौ बारह हो गई है। चूहे बेचारों को जबरन बदनाम किया जा रहा है । अफसर धान को चूहों से बचाने के नाम पर करोड़ो की चूहामार दवाई पिंजरा और न जाने क्या क्या के बिल लगा अपनी श्रीमती के महंगे शौक पूरे कर बचे पैसों से अपने बच्चों का पेट पाल रहे अब चूहे द्वारा करोड़ो धान खाने के बहाने गबन का इतिहास रच रहे । बोले तो गबन सिंग का नाम चूहा सिंग हो गया ।
नाम मे क्या रक्खा है का ज्ञान बांटने वाले भक्त और चमचो को नाम की महिमा का गबन सिंग और चूहे राम से अच्छा उदाहरण नही मिलेगा । नाम में क्या रक्खा है कहने वाले कभी योजनाओं व पुरष्कार व भवनों के नाम कुछ लोगो के नाम पर रखने की जगह गोबरहिंन टुरी टाइप के लोगो के नाम पर भी रख लेते । खैर शेक्सपियर चच्चा कुछ भी कहे नाम में रक्खा तो बहुत कुछ है।
समस्या विपक्ष को RAM के नाम से है। ये विधेयक संसद से पारित हो गया अब राम नाम जुड़ गया है । जिससे आदतन तकलीफ तो कुछ लोगो को होनी ही है । प्रियंका वाड्रा को तकलीफ थी कि “विधायक” संसद में पेश होता है और बिना किसी चर्चा के पास हो जाता है । अब गलत तो है पर क्या है न जब विपक्ष संसद की कार्यवाही को ठप्प करने की नियति से बहिर्गमन करता रहेगा तो ऐसे ही बिल पारित होते ही रहेंगे ।
चलते चलते :-
पुलिस विभाग में आखिर कौन है मुखबिर मामा ? जिसके नाम की काफी है चर्चा । क्या पद का फायदा उठा मामा मुखबिर के नाम पर लगाया जा रहा सरकारी खजाने को चुना ? मामा मुखबिर नाम कोरी अफवाह है या है कोई सच्चाई ?
और अंत मे :-
ख़बर छुपाई जाती है, अफ़वाह उड़ाई जाती है,
यह वो जमाना है ,
जहाँ कहानी कुछ और होती है, सुनाई कुछ और जाती है ।
#जय_हो 11 जनवरी 2026 कवर्धा (छत्तीसगढ़)







