ईरान पर हमले की आशंका से भारतीय शेयर बाजार में डर, गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

Indian Stock Market 14 January 2026: अमेरिकी टैरिफ की धमकी से शेयर बाजार में हड़कंप मचा है. निफ्टी और सेंसेक्स भारी गिरावट के साथ खुले है. जानिए क्यों विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं.

आज सुबह जब भारतीय शेयर बाजार खुला, तो निवेशकों के चेहरे पर थोड़ी मायूसी दिखी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बुधवार की शुरुआत ‘रेड जोन’ में हुई, यानी मार्केट गिरावट के साथ खुला है. इसकी सबसे बड़ी वजह सात समंदर पार अमेरिका से आ रही खबरें हैं. दरअसल, अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ (टैक्स) लगाने की धमकी दी है. इस भू-राजनीतिक तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में हलचल मच गई है और हमारा निफ्टी 50 इंडेक्स 83.75 अंकों की गिरावट के साथ 25,648.55 पर खुला है. वहीं, सेंसेक्स भी पीछे नहीं रहा और 257.63 अंकों की डुबकी लगाकर 83,370.06 के स्तर पर आ गया है.

विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं अपना पैसा?

बाजार के नीचे गिरने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है, बल्कि कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे बड़ी चिंता विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली है. ये विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. मंगलवार के आंकड़ों को देखें तो इन्होंने करीब 1,499.81 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं. हालांकि, हमारे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,181.78 करोड़ रुपये की खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की है, लेकिन विदेशी दबाव इतना ज्यादा था कि बाजार संभल नहीं पाया. इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया भी निवेशकों को डरा रहा है.

सेक्टर्स का क्या हाल है और कहां हो रही है कमाई?

अगर हम अलग-अलग सेक्टर्स की बात करें, तो हर जगह माहौल एक जैसा नहीं था. आईटी (IT) और मीडिया सेक्टर्स में आज अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है, वहीं ऑटो सेक्टर भी थोड़ा सुस्त नजर आया है. लेकिन इस मंदी के बीच भी कुछ सेक्टर्स ने हिम्मत दिखाई है. मेटल और सरकारी बैंक (PSU Banks) के शेयरों में थोड़ी तेजी दिखी है, जो डूबते बाजार में तिनके का सहारा बने हुए हैं. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी थोड़े नीचे खुले है, लेकिन वहां गिरावट उतनी ज्यादा नहीं थी जितनी बड़े शेयरों में दिखी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मार्केट अभी ‘कंसोलिडेशन’ यानी ठहराव के दौर में है, जहां निवेशक बहुत सोच-समझकर कदम रख रहे हैं.

क्या आगे बाजार में सुधार की उम्मीद है?

भले ही ग्लोबल हालात थोड़े तनावपूर्ण दिख रहे हों, लेकिन भारत के अंदर से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं. दिसंबर महीने के महंगाई के आंकड़े रिजर्व बैंक (RBI) के तय दायरे में रहे हैं, जिससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती हो सकती है. हालांकि, बड़ी आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं, जिससे बाजार पर थोड़ा दबाव बना हुआ है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है. फिलहाल, मार्केट ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए.

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