
रायपुर, 20 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित एक प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करके, उन्हें स्थायी आजीविका और वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है। सच्ची लगन, सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प यदि एक साथ मिल जाएँ, तो ग्रामीण जीवन में किस प्रकार बड़ा परिवर्तन आ सकता है, इसकी मिसाल पेश की है बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखण्ड अंतर्गत नेगीगुड़ा गाँव की श्रीमती शशिरेखा सेठिया ने।
वर्ष 2017 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित जय माँ दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपनी स्वावलंबन यात्रा की शुरूआत की। शुरुआती दिनों में उन्होंने ग्राम संगठन से 60 हजार रुपए का ऋण प्राप्त कर मक्के की खेती शुरू की, जिसने उनके भीतर उद्यमिता की एक नई उम्मीद जगाई।
*नकदी एवं उन्नत सब्जियों का उत्पादन में हुई लगातार वृद्धि*
पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए शशीरेखा जी ने कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और बिहान से मिली सीख के बल पर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया। बेहतर आय की संभावना को देखते हुए उन्होंने खीरा और टमाटर जैसी नकदी एवं उन्नत सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। उनकी दिन-रात की कड़ी मेहनत और सही समय पर लिए गए निर्णयों का परिणाम यह रहा कि फसल उत्पादन में लगातार वृद्धि होती गई और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती चली गई।
*लखपति दीदी के रूप बनी खास पहचान*
कभी अपनी प्राथमिक आर्थिक जरूरतों के लिए सीमित संसाधनों पर निर्भर रहने वाली शशिरेखा सेठिया आज अपनी इस उन्नत खेती के दम पर सालाना 5 लाख रुपए से 8 लाख रुपए तक की शानदार आय अर्जित कर रही हैं। अपनी इस अभूतपूर्व सफलता के बल पर उन्होंने पूरे क्षेत्र में लखपति दीदी के रूप में एक खास पहचान बना ली है।
*समय पर वित्तीय सहायता और सही दिशा से बदली पूरे परिवार की दशा*
शशिरेखा सेठिया की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को समय पर वित्तीय सहायता और सही दिशा दिखाई जाए, तो वे अटूट मेहनत के बल पर न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में सम्मानजनक आजीविका अर्जित करते हुए पूरे परिवार की दशा बदल सकती हैं। आज उनकी यह सफलता की कहानी जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी है।









