
– जिले के 85 दिव्यांगजन निभाएंगे मेट की महत्वपूर्ण भूमिका
राजनांदगांव 21 जुलाई 2026। विकसित भारत जी-रामजी योजना अंतर्गत समावेशी विकास एवं समान अवसर की अवधारणा को साकार करते हुए राजनांदगांव जिले में 85 दिव्यांगजनों को मेट के रूप में जिम्मेदारी प्रदान की गई है। जिसमें जनपद पंचायत डोंगरगांव अंतर्गत 8, जनपद पंचायत छुरिया अंतर्गत 16, जनपद पंचायत डोंगरगढ़ अंतर्गत 19 एवं जनपद पंचायत राजनांदगांव अंतर्गत 42 दिव्यांगजनों को मेट की जिम्मेदारी दी गई है। यह पहल दिव्यांगजनों को सम्मानजनक रोजगार एवं उत्तरदायित्व प्रदान करने के साथ-साथ योजना के प्रभावी, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। योजना अंतर्गत प्रत्येक दिव्यांग मेट को अपने कार्यक्षेत्र में 50 से अधिक श्रमिकों के कार्यों का नियमित अनुश्रवण एवं समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मेट श्रमिकों के रोजगार मांग पंजीयन से लेकर मास्टर रोल जारी कराने हेतु मांग प्रस्तुत करने, कार्यस्थल पर श्रमिकों की उपस्थिति का सत्यापन, दैनिक कार्यों का निरीक्षण, कार्यों की प्रगति का रिकॉर्ड संधारित करने, जियो-टैगिंग एवं फोटो अपलोड करने, आवश्यक दस्तावेजों का संधारण, श्रमिकों को कार्यस्थल पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने तथा ग्राम पंचायत एवं संबंधित अधिकारियों के साथ सतत समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त मेट कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी रखेंगे, कार्यस्थल पर निर्धारित सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगे। श्रमिकों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं से संबंधित जानकारी समय-समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे तथा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करेंगे। इससे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी दस्तावेजीकरण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। दिव्यांगजनों को अवसर, विश्वास एवं जिम्मेदारी मिलने पर ग्रामीण विकास एवं राष्ट्र निर्माण में समान रूप से महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विकसित भारत जी-रामजी योजना अंतर्गत श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दैनिक रोजगार पारिश्रमिक 261 रूपए से बढ़ाकर 300 रूपए प्रति दिवस किया गया है। इससे श्रमिकों की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। साथ ही मेट की सक्रिय भूमिका से श्रमिकों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने, कार्यों की निगरानी को प्रभावी बनाने तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।







