सुधा कण बूँद पत्तों पर, अजी मोती कहाती है।
धरा पर ओस की चादर, सदा हिय को लुभाती है।
शिशिर सूरज सुहाना है, लगे सबको बड़ा प्यारा-
गरम ये चाय अदरक की, सुकूँ हमको दिलाती है।।
शिशिर की गोद में रख सिर, धरा सपने सजाती है।
सुनहरी धूप की किरणें, हरित चादर सुहाती है।
सजाए स्वप्न मौसम ने, पकौड़े साथ ले आना-
सजाकर प्लेट फलियों से, तुम्हें ‘सुषमा’ बुलाती है।।
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…✍️कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल (रायगढ़/रायपुर छ.ग.)









