
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।
अलग-अलग भाषाओं के सुर, हर भाषा आधार है।
गंगा-यमुना रावी सतलज, धरती का शृंगार है।।
केसरिया है बलिदानों का, वीरों की ये शान है।
तीन रंग से बना तिरंगा, भारत की पहचान है।।
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।
धवल शांति का दूत विश्व में, शुभता का संदेश है।
’सुषमा’ सुंदर देश हमारा, सुखद हुआ परिवेश है।।
हरा रंग हरियाली लाए, जीवन का अभिमान है।
तीन रंग से बना तिरंगा, भारत की पहचान है।।
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।
विष्णुगुप्त की अर्थशास्त्र में, लक्ष्य हुआ आसान है।
आर्यभट्ट के योगदान से, गणना का सम्मान है।।
साहस का संदेश सँजोता, चला चक्र अभियान है।
तीन रंग से बना तिरंगा, भारत की पहचान है।।
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।
जहाँ मलय से पुष्प महकते, कोकिल गाए गान है।
वहाँ नृत्य में भाव छलकते, संगीतों में जान है।।
विश्व हितैषी भाव पोसता, अपना हिंदुस्तान है।
तीन रंग से बना तिरंगा, भारत की पहचान है।।
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।
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…✍️कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल(रायगढ़/रायपुर छ.ग.)









