
लंबे समय से देश में ये प्रश्त तैरता रहा कि देश का नया प्रधानमंत्री कौन होगा। बेहद दिलचस्प है जानना कि क्या 75 की उम्र होने पर प्रधानमंत्री मोदीजी और स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत अपना-अपना पद छोड़ देंगे।
क्योंकि भाजपा के नये नियम के अनुसार इस पड़ाव के बाद नेताओं को पद छोड़ना पड़ेगा और उनका स्थान कोई और लेगा।
बता दें कि ये सितंबर महीना बेहद खास है। 6 तारीख को मोहन भागवत के 75 पूरे हो गये और 17 को नरेन्द्र मोदी के हो रहे हैं। तो क्या नियमानुसार दोनों रिटायर हांेगे। यहां मोदी के चाहने वालों के लिये खुशखबरी है कि दोनों ही अपने पद पर बने रहंेगे। कोई भी रिटायर नहीं हो रहा है। ये बात संघ के सौ वर्ष पूरे होने के एक कार्यकम में संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा कही गयी।।
निस्संदेह देश के लिये ये अच्छी खबर है।
देवदूत हैं नरेन्द्र मोदी
भारत के लिये वरदान
देश में कई नेता ऐसे हुए हैं जिनमें मानवता कूट-कूटकर भरी रही। उनका नाम सदा सम्मान के साथ लिया जाता रहा है। कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि नरेन्द्र मोदी वो नाम है जिसे भारत का इतिहास स्वर्णाक्षरों में लिखेगा और कभी इसका कर्ज नहीं उतार पाएगा।
निस्संदेह नरेन्द्र मोदी किसी देवदूत की तरह देश में आए हैं। उनकी कार्यप्रणाली से साफ तौर पर उनकी नीयत झलकती है। यदि किसी लक्ष्य को पाने में वे असफल भी रहे तो भी एक तो उनकी नीयत पर देश को भरोसा है,
दूसरा कह सकते हैं कि आक्रमण से पहले शेर दो कदम पीछे हटता है। कदम पीछे लेने से मोदी के इरादे बदल गये ये सोचने वाले नादान हैं।मोदीजी भगवान कृष्ण की तरह ‘धर्म की रक्षा के लिये किया गया छल भी धर्म ही है’ मानने वाले हैं।
क्यों चाहता है विश्व
इंटरनेशनल हीरो
आश्चर्य जनक है कि जब भी मोदी किसी देश की यात्रा पर जाते हैं उस देश को जीत लेते हैं… दिल से जीत लेते हैं। वहां के शासक वहां की जनता मोदीजी के भक्त बन जाते हैं। ऐसा क्या जादू है मोदीजी केे व्यक्तित्व में….?
विश्व के किसी भी कोने में किसी भी प्रकार की आपदा आती है तो मदद पहुंचाने में मोदीजी का नाम सबसे उपर और सबसे पहले आता है। ऐसे बीसियों उदाहरण हैं। वे पड़ोसी दुर्भाग्यशाली हैं जो मोदीजी से या भारत से चिढ़ते हैं और मोदीजी से दोस्ती का लाभ नहीं उठा पाए।
साफ जाहिर है कि मोदीजी की नेकनियत, संकल्पशक्ति और लक्ष्य को साधने की सूझबूझ के आगे सारे नतमस्तक हैं और ऐसी शख्सियत को कुदरत भी आशीर्वाद देती है।
विपक्ष समझ नहीं पाया,देश क्या सोचता है
हर बार मुंह की खाता, बाल नोचता है
देश के इतिहास में विपक्ष कभी भी इतना लाचार, इतना असफल नहीं दिखा जितना आज दिखता है। ऐसा लगता है विपक्ष ने मोदीजी को अपना व्यक्तिगत विरोधी मान लिया है। यहां तक कि दुश्मन मान लिया है।
विपक्ष ने मोदीजी को हटाने के लिये निम्नस्तरीय हथकण्डे भी अपनाए हैं, यहां तक कि मोदीजी की मौत की भी कामना की है। लेकिन जिसके सर पर करोड़ों लोगों की दुवाओं का साया हो, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
आश्चर्य है देश में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान राजनेता हैं मगर मोदीजी का जलवा कोई समझ नहीं पाया है। जनता का रूख उनकी समझ में नहीं आ रहा है। जितना अधिक ये लोग मोदीजी को कोसते नजर आते हैं उतने ही जनता से दूर होते जाते हैं।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








