यूरोप पर भी साधा निशाना
ईरानी विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ ‘अवैध युद्ध’ का समर्थन इस उम्मीद में किया कि इसके बदले अमेरिका उन्हें रूस के खिलाफ मदद देगा. उन्होंने कहा, ‘यूरोप को लगा कि ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने से उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिल जाएगा. यह बेहद शर्मनाक है.’ अराघची ने अपनी टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक खबर भी साझा की, जिसमें बताया गया था कि बढ़ती तेल कीमतों से रूस को भारी राजस्व लाभ मिल रहा है.
5 मार्च को भारत को 30 दिन के लिए समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो खरीदने की अनुमति दी गई थी. इसका उद्देश्य चल रहे संकट के दौरान आयातकों को सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की सुविधा देना था. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम बेहद सीमित और अस्थायी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मकसद केवल बाजार को स्थिर करना है और इससे मॉस्को को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा.
नैरेटिव को भी मात देने रहा ईरान
अराघची ने फाइनेंशियल टाइम्स की जो रिपोर्ट साझा की है, उसमें कहा गया है कि मौजूदा हालात में रूस को तेल कारोबार से रोजाना करीब 150 मिलियन डॉलर (करीब 1,389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त आमदनी हो रही है. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, संघर्ष के पहले 12 दिनों के भीतर ही रूस ने तेल निर्यात से लगभग 1.3 अरब डॉलर से 1.9 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई कर ली है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो महीने के अंत तक मॉस्को को 3.3 अरब डॉलर से लेकर 5 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है.
अमेरिका ने क्यों अलाउ किया रूसी तेल?
ईरानी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को 30 दिन की छूट की घोषणा की. ईरान ने 4 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी, जिसके वजह से तेल आपूर्ति बाधित हुई और वैश्विक बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई होती है.
अमेरिका के इस फैसले के तहत उन देशों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है, जो पहले से समुद्र में फंसे कार्गो के रूप में मौजूद है. यूएस ट्रेजरी के अनुसार, इस अस्थायी लाइसेंस के तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई है, जो 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किए जा चुके थे. यह अनुमति वॉशिंगटन समयानुसार 11 अप्रैल की मध्यरात्रि तक प्रभावी रहेगी. इस कदम का उद्देश्य है- कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाया जा सके.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को मिली अनुमति
इस बीच खबर है कि ईरान ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारत के झंडे वाले दो एलपीजी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है. रॉयटर्स ने दो अन्य सूत्रों और Lloyd’s List Intelligence के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए बताया कि सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर चल रहा एक टैंकर भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के बाद शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है.