
अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार धुरंधर ने धुरंधर रफ्तार पकड़ी हुई है और धुरंधर धंधा कर रही है। इतिहास में सबसे अधिक धंधा करने वाली पुष्पा-2 द रूल का रिकाॅर्ड तोड़ दिया धुरंधर ने। यानि एक नया इतिहास बनाया है। और आगे सफर जारी है। अल्लु अर्जुन की पुष्पा-2 को पीछे छोड़ दिया है
धुरंधर (3) स्टोरी कन्टीन्यूज

इससे पहले दो बार धुरंधर पर लिख चुका हूं यह तीसरा लेख है
मिराज थियेटर में शुरूआत में राष्ट्रगान हुआ और उस समय सारे दर्शक खड़े हो गये। सुखद अनुभव रहा।
खुशी है कि हम लोग अब देश पर न्यौछावर हो जाने वालों की कहानियां बना भी रहे हैं और लोग चाव से देख भी रहे हैं।
गाली गलौज का
मजा ही कुछ और है
वैसे किसी भी लड़ाई के समय गाली देने से उत्साह और साहस बरकरार रहता है।
काॅलेज के मित्र इसकी पुष्टि कर सकते हैं। गाली देेने से मन की भड़ास निकल जाती है।
दुख कम हो जाता है ये अलहदा है कि जिसे गाली देते हैं और वो सामने हुआ या उसे पता चल गया तो फिर वो दुख बढ़ा सकता है। मसलन पुलिस वाले को या नेता को या अगर स्टूडेन्ट हुआ तो अपने टीचर को गाली देने में यही रिस्क होता है।
जब आप पीट रहे हों तो गाली देने से जोश बढ़ता है।
महिला वर्ग
वंचित रह गया
जोश बढ़ाने में गालियों का कारगर योगदान होता है, ये एक सच्चाई है मगर ये भी सच है कि फिल्म में गालियां होने से आप परिवार के साथ नहीं देख सकते और महिलाएं अकेले प्रायः नहीं जातीं तो इससे हो ये रहा है कि परिवार की महिलाएं, बच्चे यानि पूरा परिवार इस बढ़िया मूवी से वंचित हो रहा है।
जब हम एडवान्स नहीं थे यानि बैकवर्ड थे तो संयमित गालियों का प्रयोग करते थे। जैसे कुत्ते, कमीने… । हमारे प्यारे धर्मेन्द्र का डायलाॅग बहुत प्रसिद्ध हुआ ‘कुत्ते मैं तेरा खून पी जाउंगा’।
मगर धुरंधर में काफी वजनदार, नाॅन वेजेटेरियन गालियों को सीन के हिसाब से संजोया गया है।
कहानी और सिचुएशन के हिसाब तो ये गालियांे जमीं, लेकिन हम लोगों की पारिवारिक सिचुएशन के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहीं।
इसलिये गालियां नहीं डालनी थीं। अभी भी वक्त है जहां-जहां गालियां हैं वहां पर बीप की आवाज डाल दें तो बहुत से परिवार धुरंधर को देख पाएंगे। हम जैसे लोगों को जिन्हें बहुत पसंद आयी दोबारा परिवार के साथ देखने का मौका मिल जाएगा।
पुराने गाने
खूबसूरत ढंग से घुसेड़े
मजा आया
पूरी फिल्म में अनावश्यक गाने नहीं भरे गये हैं। जो दिखाए भी गये उन्हें काफी आकर्षक ढंग से। पुराने जमाने की धुनों को परोसा गया है। कर्ज के गाने मेरी उमर के नौजवानों, दिल न लगाना ओ दीवानों की म्युजिक और गाना रंबा हो, हो ,हो, हो हो हो’ अच्छा बन पड़ा। कहीं पर पुरानी फेमस गजल की कुछ लाईनें भी जमीं।

दुर्भाग्यपूर्ण हकीकत़
डायलाॅग ‘हिंदुस्तानियों का सबसे बड़ा दुश्मन हिंदुस्तानी ही है, पाकिस्तान तो दूसरे नंबर पर आता है’ शर्मसार कर गया। ये महज डायलाॅग नहीं है, ये दुर्भाग्यपूर्ण हकीकत है कि इतने गये-गुजरे हैं हम लोग।
अपने ही जांबाज जासूसों को
मरवा दिया मोरारजी भाई ने
इससे भी दिल को रूला देने वाला ये इतिहास है कि हमारे एक प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने एक ऐसी गलती कर दी थी जिसके लिये देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।
विद्वजन बताते हैं कि वे ‘राॅ’ से नफरत करते थेे कि राॅ का गठन उनकी विरोधी इंदिरा गांधी ने किया था।
इसलिये जब कांग्रेस की सरकार और इंदिरा गांधी हटीं और जनता पार्टी की सरकार बनी, मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बनें। कहते हैं वे नितान्त सिद्धांतवादी और ईमानदार नेता थे।

तब उन्होनें राॅ को इंदिरा गांधी का वफादार मानकर विदेशी विराधी हुकूमतों को उनके देशों में हमारे लिये जासूसी कर रहे सारे राॅ एजेन्टों के नाम बता दिये।
पाकिस्तान ने मोरारजी का किया
सर्वोच्च सम्मान
वे बेचारे जांबाज देशभक्त सिपाही बेमोत मारे गये कितना दुखद है जिनकी जान की रक्षा के लिये वे अपनी जान दांव पर लगा रहे थे उन्होंने ही उनकी निर्मम हत्या करवा दी। पता नहीं जीवन में कभी मोरारजी देसाई को इसका पछतावा हुआ होगा या नहीं।
मोरारजी के इस अहसान के बदले पाकिस्तान ने उन्हें अपने देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था ऐसा बताया जाता है। आगे फिर इस पर विस्तार से बात करेंगे।
देश के अधिकांश लोगों को ये हकीकत मालूम नहीं है। ये एक ऐसी हकीकत है जिसका बोझ मन पर हमेशा रहेगा। इसी बोझ के साथ… भारी मन से… जयहिंद… फिर बात करेंगे धुरंधर की। क्यांेकि इतने भर से मन नहीं भरा। ं————————–
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700






