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आने वाला है साल का सबसे छोटा दिन, जानें कब है शीतकालीन संक्रांति

इसी माह शीत अयनांत होगा, जब दिन सबसे छोटा और रात सबसे लंबी होती है. जानें सूर्य की स्थिति, पृथ्वी के झुकाव और धार्मिक महत्व.

साल का वह समय करीब है, जब दिन सबसे छोटे और रातें सबसे लंबी होती हैं. इसे ही शीतकालीन संक्रांति/शीत अयनांत (Winter Solstice) कहा जाता है, जो न सिर्फ सर्दियों की शुरुआत का संकेत देता है बल्कि प्रकृति में होने वाले अद्भुत बदलावों को भी दर्शाता है. यह घटना किसी घड़ी या डे-लाइट सेविंग की वजह से नहीं, बल्कि पृथ्वी के झुकाव से होती है.

क्यों जल्दी ढलता है सूरज?

जब हर साल घड़ियों को पीछे किया जाता है, तो सर्दियों की सुबह में हमें ज्यादा रोशनी मिलती है, लेकिन शाम जल्दी ढलने लगती है. दिसंबर की शुरुआत से ही सूर्यास्त जल्दी होने लगता है और यह क्रम साल के सबसे छोटे दिन—शीतकालीन संक्रांति/शीत अयनांत—पर जाकर रुकता है.

सूर्य कब होता है कर्क रेखा के ऊपर?

नेशनल वेदर सर्विस के अनुसार, शीत अयनांत तब होता है जब सूर्य सीधी रेखा में कर्क रेखा (Tropic of Capricorn) के ऊपर स्थित होता है. यह रेखा भूमध्य रेखा से 23.5 डिग्री दक्षिण में है और ऑस्ट्रेलिया, चिली, दक्षिणी ब्राजील और उत्तरी दक्षिण अफ्रीका से होकर गुजरती है.

2025 में कब होगा शीतकालीन संक्रांति?

साल 2025 में उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति/शीत अयनांत 21 दिसंबर, रविवार को सुबह 10:03 बजे (EST) होगा. इसी दिन सूर्य की किरणें उत्तरी हिस्सों में सबसे कम पहुंचती हैं, जिसके कारण दिन छोटा और रात सबसे लंबी होती है.

पृथ्वी के झुकाव से बदलती ऋतुएं

शीत अयनांत का कारण पृथ्वी का सूर्य से लगभग 23.5 डिग्री का झुकाव है. पृथ्वी का यह झुकाव ही तय करता है कि साल में किस समय पर किस हिस्से में कितनी धूप मिलेगी. इसी झुकाव और सूर्य से दूरी की वजह से साल में दो महत्वपूर्ण घटनाएं होती हैं—

  • शीत अयनांत (Winter Solstice)
  • ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice)

धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन?

शीत अयनांत सिर्फ खगोल विज्ञान की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कई संस्कृतियों और धार्मिक परंपराओं में इसे नए आरंभ, ऊर्जाओं के संतुलन और प्रकृति की नई चक्र की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है.

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