Tuesday, March 5

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी… दिखाई चार बिल की झांकी भुनाया एक, तीन हैं बाकी

संसद के विशेष सत्र में तमाम तरह के कयास लगाए जाते रहे कि फलां कानून बनेगा, फलां कानून बनेगा। इसमें एक बदलाव देश का नाम इण्डिया से हटाकर भारत करने का भी होने का अंदाजा लगाया जा रहा था।
लेकिन सियासत के चतुर खिलाड़ी मोदी-शाह की जोड़ी ने एक ही तीर महिला आरक्षण बिल का चलाया। बाकी के बचा के रखे हैं। एक ही दांव की इतनी चर्चा हो रही है। वाहवाही हो रही है तो बाकी के हथियार बचा के रखना ही समझदारी है।

अब देश को हिंदुस्तान और इण्डिया न कहकर भारत कहना होगा, ये बिल संसद मंे लाना अभी बचा के रखा है। यानि तरकस में ये और ऐसे कुछ और धारदार तीर अभी बाकी हैं।

दिलचस्प और शाबाशी के लायक बात ये है कि बाबा रामदेव के व्यापारिक संस्थान में जो प्रोडक्टस बनते हैं उनमें पहले सेे ही ‘भारत में निर्मित’ लिखा होता है न कि मेड इन इण्डिया।

छत्तीसगढ़ी चोर को भी आस
मोदी का नारा, सबका विकास

विकास, तरक्की, डेवलपमेन्ट, वा भाई वा। धन्य है छत्तीसगढ़। धन्य हमारे नेता। प्रदेश ने वाकई तरक्की की है। चहुंओर तरक्की। मोदीजी ने भी कहा था सबका साथ, सबका विकास। विकास तो हो रहा है। हर किसी का। जिसमें ये भी शामिल हैं। पहले छोटे-मोटे काम किये। अब बड़ा हाथ मारा।

प्रदेश से सीधे देश की राजधानी। छत्तीसगढ़ से सीधे दिल्ली। वहां भी लाखों की बात नहीं। करोड़ों का दांव। ज्वेलरी शोरूम में 25 करोड़ की चोरी। 25 करोड़ की हीरों और सोने की ज्वेलरी की चोरी छत्तीसगढ़ के चोरों द्वारा। हां जी छत्तीसगढ़ के चोरों द्वारा। बधाई। बधाई। इतनी तरक्की। इतना विकास। मोदीजी ने शुरू से यही कहा है ‘सबका साथ, सबका विकास’।
इस ‘सब’ में चोर भी तो शामिल हैं, हुजूर।

भाजपा भी मौन,
पचड़े में पड़े कौन

इण्डी एलायंस ने हयात होटल में मीटिंग की। महागठबंधन को हयात होटल में रूकने मेें हया नहीं आई। देश के गरीबों पर दया नहीं आई। बताते हैं कि एक कमरे का किराया 14 हजार है। 54 हजार सिर्फ कुर्सी पर खर्च आया। एक प्लेट वड़ापाव सात सौ रूप्ये का।

 एक व्यक्ति के एक टाईम खाने का खर्च लगभग साढ़े चार हजार है। इस बैठक के लिये करोड़ांे खर्च कर दिया गया। ये करोड़ों रूप्या कहां से आया। अपने चम्पक चाचा को अचानक याद आ गया कि प्रधानमंत्री ने अपने किसी मित्र का दिया दस लाख का सूट पहना था तो समूचा विपक्ष बिलबिला गया था।

खैर हयात में करोड़ों खर्च की सुगबुगाहट हुई तो आयोजक पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे ने पलटकर पूछा है कि विधायकों को घुमाने के लिये किये गये खर्चे का ब्यौरा दें फिर हमसे पूछें।

एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना से बगावत कर विधायकों को आसाम ले जाकर रखने की और फिर उद्धव सरकार गिरा देने की टीस उभर आई। जिसका ताना उद्धवपुत्र ने मारा। माने अगर हम चोर हैं तो वो भी तो है।
बस यही रिवाज है हमारे यहां का। खुद पर आरोप की सफाई मत दो सामने वाले पर भी आरोप लगा दो। उसका मुंह खुद ब खुद बंद हो जाएगा।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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