
रायपुर, 07 मई 2026/ बस्तर जिले के कलचा गांव की रहने वाली तुलसा बघेल आज ग्रामीण सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिख रही हैं। कभी पारंपरिक खेती और संसाधनों के अभाव में गुजर-बसर करने वाली तुलसा ने तकनीकी सुधारों को अपनाकर न केवल अपनी किस्मत बदली है, बल्कि अपनी आधा एकड़ जमीन को भी आय का मुख्य स्रोत बना दिया है। उनके जीवन में बदलाव की यह कहानी साल 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के साथ शुरू हुई, जहां से उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीक की पहली सीख ली।
शुरुआती दिनों में जानकारी के अभाव और सिंचाई की सुविधा न होने के कारण तुलसा केवल वर्षा आधारित खेती ही कर पाती थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने सबसे पहले मात्र 7 हजार रुपए का छोटा कर्ज लेकर बाड़ी विकास की दिशा में कदम बढ़ाया। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने मचान विधि और लाइन कतार पद्धति जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाया। जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती गई, उन्होंने खेती के विस्तार के लिए बैंक लिंकेज के माध्यम से 60 हजार रुपए का ऋण लिया और अपने खेत में बोरवेल की स्थापना कराई। इस एक कदम ने उनकी खेती की पूरी तस्वीर बदल दी, क्योंकि अब वे साल भर फसलों का उत्पादन करने में सक्षम हो गई हैं।
वर्तमान में तुलसा बघेल ने सब्जी उत्पादन को अपना मुख्य व्यवसाय बना लिया है, जिसमें उन्होंने पत्ता गोभी, मटर और भिंडी की सफल पैदावार ली है। अब वे आगामी खरीफ सीजन के लिए भिंडी, तोरई और खीरा जैसी फसलों की तैयारी में जुट गई हैं। खेती से प्राप्त मुनाफे का उपयोग उन्होंने बहुत ही समझदारी से किया है। उन्होंने अपने कच्चे मकान को पक्के मकान में तब्दील कर लिया है और अपनी बेटी की शादी की तैयारी भी कर रही हैं।
अपनी मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ी तुलसा अब केवल कृषि तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। भविष्य की योजनाओं को लेकर वे बताती हैं कि वे जल्द ही मुर्गी पालन के क्षेत्र में कदम रखने जा रही हैं, ताकि आय के स्रोतों में और अधिक विविधता आ सके। एक साधारण मजदूर से सफल उद्यमी किसान बनने का उनका यह सफर बस्तर के ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं और तकनीकी सहयोग के सकारात्मक प्रभाव को साफ तौर पर दर्शाता है।









