Ro no D15139/23

सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश: बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग

इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम

जगदलपुर, 07 मई 2026/ बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय “सल्फी” को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

हर्षवर्धन “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके।

उन्होंने बताया कि सल्फी का रस पेड़ से निकालने के कुछ समय बाद ही प्राकृतिक रूप से किण्वित होने लगता है, जिससे यह हल्का मादक पेय बन जाता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हर्षवर्धन ने अपने प्रयोगों के माध्यम से इस फरमेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सल्फी की मूल गुणवत्ता और स्वाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

बस्तर की संस्कृति से जुड़ी है सल्फी

सल्फी बस्तर की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग “बस्तर बीयर” के नाम से भी जानते हैं। यह कैरियोटा यूरेन्स ;ब्ंतलवजं नतमदेद्ध नामक ताड़ प्रजाति के पेड़ से निकलने वाला मीठा रस है। ताजा सल्फी का स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और ताजगीभरा होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद इसमें प्राकृतिक खमीर बनने लगता है, जिससे यह हल्का नशीला हो जाता है। ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सल्फी का सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर विशेष महत्व है। विवाह, पारंपरिक उत्सव और सामाजिक आयोजनों में इसे प्रमुखता से परोसा जाता है। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सल्फी पर निर्भर है। स्थानीय लोग इसे पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी भी मानते हैं।

जीआई टैग दिलाने का सपना

हर्षवर्धन का सपना है कि बस्तर की इस पारंपरिक पेय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। वे चाहते हैं कि सल्फी को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक पेय के रूप में प्रचारित किया जाए और भविष्य में इसे बस्तर के लिए जीआई टैग भी प्राप्त हो। उनका मानना है कि यदि सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो यह बस्तर के आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

  • Related Posts

    पेपर लीक की सूचना मिलते ही कृषि मंत्री नेताम ने दिखाई सख्ती, तत्काल FIR और जांच के निर्देश

    रायपुर, 20अगस्त 2026/इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना को कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने गंभीरता से…

    Read more

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चमोली सुरंग हादसे में कोंडागांव जिले के मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की सहायता देने के दिए निर्देश

    *दुःख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय*   रायपुर 20 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय…

    Read more

    NATIONAL

    भारत में विदेशी पर्यटक क्यों नहीं आ रहे? थाईलैंड-वियतनाम से पीछे रहने की 3 बड़ी वजहें

    भारत में विदेशी पर्यटक क्यों नहीं आ रहे? थाईलैंड-वियतनाम से पीछे रहने की 3 बड़ी वजहें

    BJP छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने कहा- मकान मालिक 1 तारीख को मांगता है किराया

    BJP छोड़ने के बाद शहजाद पूनावाला ने कहा- मकान मालिक 1 तारीख को मांगता है किराया

    माता सीता की रक्षा एक तिनके से

    माता सीता की रक्षा एक तिनके से

    युवाओं के लिए CM योगी की नसीहत, ड्रग्स और स्मार्टफोन के नशे से रहें दूर

    युवाओं के लिए CM योगी की नसीहत, ड्रग्स और स्मार्टफोन के नशे से रहें दूर

    UP Election 2027: हैट्रिक के मिशन पर CM योगी का मास्टर प्लान तैयार, एक फैसले से बढ़ सकती है विपक्ष की मुश्किल

    UP Election 2027: हैट्रिक के मिशन पर CM योगी का मास्टर प्लान तैयार, एक फैसले से बढ़ सकती है विपक्ष की मुश्किल

    डोनाल्ड ट्रंप को पसंद आया भारत का वोटर आईडी सिस्टम, ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर की तारीफ

    डोनाल्ड ट्रंप को पसंद आया भारत का वोटर आईडी सिस्टम, ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर की तारीफ